संयुक्त किसान मोर्चा ने भेजा सरकार को पत्र

नई दिल्ली. दिल्ली को 21 दिन से घेरकर बैठे किसानों की 40 यूनियनों के प्रमुख निकाय ने केन्द्र को पत्र लिखकर कहा कि वह विवादस्पद कानून पर अन्य किसान संगठनों से समानांतर बातचीत ना करे। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को ऐसे समय में पत्र लिखा है कि जब वह विभिन्न राज्यों के कई किसान संगठनों से बातचीत कर रही है और केन्द्र ने दावा भी किया है कि इन संगठनों ने नए कृषि कानूनों का समर्थन किया है।

संयुक्त किसान मोर्चा कई किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करता है। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक अग्रवाल को लिखे पत्र में मोर्चे ने कहा कि केन्द्र को दिल्ली से लगी सीमाओं पर तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी प्रदर्शन को बदनाम करना भी बंद करना चाहिए। संयुक्त किसान मोर्चा के सदस्य दर्शन पाल ने हिंदी में लिखे पत्र में कहा कि हम चाहते हैं कि सरकार किसानों के आंदोलन को बदनाम करना और अन्य किसान संगठनों के साथ समानांतर बातचीत करना बंद करे।

पत्र में पाल ने सरकार के नए कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज करने के किसान यूनियन के फैसले की भी लिखित में जानकारी दी। हम सरकार को बताना चाहते हैं कि किसानों ने एक संयुक्त बैठक कर केन्द्र के प्रस्ताव को चर्चा के बाद खारिज कर दिया। पिछली बातचीत में ही किसानों ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया था।

उल्लेखनीय है कि नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते हुए दिल्ली से लगी सीमाओं पर हजारों किसान 21 दिन से डटे हुए हैं। केन्द्र सरकार सितम्बर में पारित तीन नए कृषि कानूनों को कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के तौर पर पेश कर रही है। किसानों ने आशंका जताई है कि नए कानूनों से एमएसपी और मंडी व्यवस्था खत्म हो जाएगी और वे बड़े कॉरपोरेट पर निर्भर हो जाएंगे।

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