नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केन्द्र सरकार पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या मामले में मौत की सजा पाए बलवंत सिंह राजोआना की उस अर्जी पर 26 जनवरी तक फैसला करे जिसमें उसने सजा कम करने का अनुरोध किया है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि गणतंत्र दिवस से पहले फैसला लिया जाना चाहिए जो अच्छा दिन है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दो-तीन हफ्ते का समय देते हैं। प्रक्रिया 26 जनवरी तक पूरी करनी चाहिए। 26 जनवरी अच्छा दिन है। यह उचित होगा कि उससे पहले फैसला लें। वर्ष 1995 में चड़ीगढ़ स्थित सचिवालय के समक्ष हुए बम धमाके में बेअंत सिंह और कम से 16 अन्य लोगों की मौत हो गई थी। राजोआना को विशेष अदालत ने वर्ष 2007 में मौत की सजा सुनाई थी।

कानून वापस लिया जाना ही एकमात्र समाधान

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा ने शुक्रवार को कहा कि तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लिया जाना ही इस मुद्दे का समाधान है क्योंकि इसके अलावा कोई दूसरा समाधान नहीं है।

उन्होंने पंजाब के उन कांग्रेस सांसदों से मुलाकात के दौरान यह टिप्पणी की जो केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध और प्रदर्शनकारी किसानों के समर्थन में पिछले एक महीने से जंतर-मंतर पर खुले आसामान के नीचे धरने पर बैठे हुए हैं।

गुरजीत सिंह औजला, रवनीत बिट्टू, जसबीर गिल और कई अन्य सांसदों ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के आवास 12, तुगलक लेन पहुंचकर प्रियंका से मुलाकात की। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी अपने परिवार के एक सदस्य के गंभीर रूप से बीमार होने के चलते इन दिनों विदेश में हैं। सांसदों से मुलाकात के दौरान प्रियंका ने कहा कि हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे। हम किसानों के साथ हमेशा रहे हैं। समाधान यही है कि कानून वापस लिए जाएं। इसके अलावा कोई और समाधान नहीं है।

किसान संगठनों की मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को वापस लिया जाए और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी दी जाए। किसान दिल्ली के निकट पिछले करीब 40 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। जबकि सरकार का कहना है कि ये कानून कृषि क्षेत्र में बड़े सुधार के कदम हैं और इनसे खेती से बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी तथा किसान अपनी उपज देश में कहीं भी बेच सकते हैं।

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