नई दिल्ली. एक आरटीआई कार्यकर्ता ने केन्द्रीय कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण मंत्रालय से आरटीआई आवेदन के जवाब में मिले उत्तर के आधार दावा किया है कि केन्द्र सरकार ने तीन कृषि विधेयकों को पारित कराने से पहले किसान संगठनों के साथ बैठक अथवा चर्चा नहीं की।

सूचना का अधिकार आवेदन के जवाब में केंद्र ने कहा है कि तीन कृषि विधेयकों को अंतिम रूप देने से पहले किसान संगठनों के साथ बैठकों या चर्चाओं से संबंधित किसी भी तरह का कोई रिकॉर्ड उसके पास नहीं है। एक समाचार एजेंसी के अनुसार मुंबई स्थित आरटीआई कार्यकर्ता और सामाजिक प्रचारक जतिन देसाई ने कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग में एक आरटीआई आवेदन दायर करके तीन साधारण सवाल पूछे थे।

सवालों में तीन कृषि अध्यादेशों को आगे बढ़ाने से पहले किसान संगठनों के साथ कितनी बैठकें की गईं, यह कहां पर आयोजित हुई और इसके लिए किसे आमंत्रित किया गया जैसे तीन सवाल शामिल थे। इसके अलावा अध्यादेशों के बीच मसौदा कानूनों पर चर्चा करने के लिए आयोजित बैठकों की संख्या भी पूछी गई थी।

जवाब में मंत्रालय के सीपीआईओ ने कहा कि यह सीपीआईओ इस मामले में कोई रिकॉर्ड नहीं रखता है। कार्यकर्ता का कहना है कि यह प्रतिक्रिया भ्रामक और अपूर्ण है। इसलिए इसके खिलाफ अपील दायर की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परामर्श आयोजित किया गया था या नहीं और उसके रिकॉर्ड संजोकर रखे गए हैं या नहीं।

सीपीआईओ के जवाब से प्रतीत होता है कि किसानों और अन्य हितधारकों के साथ कोई विचार-विमर्श किए बिना देश की कृषि और अर्थव्यवस्था के लिए इतने महत्वपूर्ण कानूनों को पारित कर दिया गया। आरटीआई कार्यकर्ता ने  दिल्ली और आसपास के राज्यों में वर्तमान में बड़े पैमाने पर किसानों के आंदोलन के आधार पर कृषि विभाग से आग्रह किया है कि वे इस मामले में वास्तविक तथ्यों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करें।

Leave a comment

Your email address will not be published.