नई दिल्ली. निजीकरण की राह पर तेजी से आगे बढ़ रही मोदी सरकार के फैसलों के खिलाफ बीएसएनएल के कर्मचारी संगठनों ने फिर मुट्ठी तान ली है। बीएसएनएल के आठ कर्मचारी संगठनों ने 26 नवंबर को आम हड़ताल का आह्वान किया है। संगठनों का आरोप है कि सरकार बीएसएनएल की 4जी सेवा शुरू करने की राह में रोड़े अटका रही है।

बीएसएनएल ने विदेशी वेंडरों के प्रति झुकाव होने तथा स्वदेशी कंपनियों को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों के अनुकूल नहीं होने के आरोपों के चलते मार्च में जारी की गई अपनी 4जी निविदा रद्द कर दी थी। जिन आठ संगठनों ने हड़ताल का आह्वान किया है, उनमें ‘बीएसएनएल कर्मचारी संघ, नेशनल फेडरेशन ऑफ टेलीकॉम एंपलॉइज, बीएसएनएल मजदूर संघ, बीएसएनएल ऑफिसर्स एसोसिएशन, नेशनल यूनियन ऑफ बीएसएनएल वर्कर्स, टेलीकॉम एंपलॉइज प्रोग्रेसिव यूनियन आदि शामिल हैं।

सभी संगठनों ने केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की सात सूत्री मांगों तथा अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर 26 नवंबर को आम हड़ताल का आह्वान किया है। कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि बीएसएनएल का पुनरुद्धार अभी दूर की कौडी है क्योंकि सरकार ईमानदार कदम नहीं उठा रही है। सरकार बीएसएनएल की 4जी सेवाओं की लॉन्चिंग में रोड़े अटका रही है। संगठनों का आरोप है कि दूरसंचार विभाग ने बीएसएनएल को एक सिस्टम इंटीग्रेटर के माध्यम से अपना 4जी नेटवर्क लॉन्च करने के लिए कहा। जबकि भारत में किसी भी निजी दूरसंचार सेवा प्रदाता ने सिस्टम इंटीग्रेटर के माध्यम से नेटवर्क नहीं चलाया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि विशेषज्ञों का कहना है कि सिस्टम इंटीग्रेटर मॉडल महंगा है और तकनीकी खराबी को सहने लायक नहीं हैं।

संगठनों का आरोप है कि टेंडर रद्द होने के पांच महीने बाद भी सरकार यह पहचान करने और बताने में असमर्थ रही है कि कौन सा घरेलू निर्माणकर्ता बीएसएनएल की 4जी सेवाओं की पूरा करने में सक्षम है। 4जी सेवा के मुद्दे के अलावा संगठन चाहते हैं कि सरकार संविदा कर्मचारियों की छंटनी बंद करे। 1 जनवरी 2017 से तीसरे वेतन संशोधन के मुद्दे और पेंशन संशोधन का निपटारा करे। अन्य मांगों में सभी गैर-आयकर कर देने वाले परिवारों के लिए प्रति माह 7,500 रुपये का नकद हस्तांतरण, सभी जरूरतमंदों को प्रति माह 10 किलो मुफ्त राशन, सरकार और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों की जबरन समयपूर्व सेवानिवृत्ति पर परिपत्र को वापस लेना शामिल है।उल्लेखनीय है कि बीएसएनएल को 2019-20 में 15,500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

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