मरीजों की जान पर मंडराए खतरे के बादल

जयपुर. कोरोना, कोरोना, कोरोना, मीडिया से लेकर सरकार तक रात और दिन कोरोना की माला जपने से इतना भय फैल गया कि ब्लड बैंकों के भंडार रीते हो गए हैं। नतीजा ना गम्भीर रोगियों की जान बचाने के लिए रक्त मिल पा रहा है और ना ही कोरोना से लड़ने के लिए प्लाज्मा उपलब्ध हो पा रहा है।

राजस्थान के प्रमुख ब्लड बैंक स्वास्थ्य कल्याण के मानद सचिव डा. एसएस अग्रवाल की एक वर्चुअल प्रेस कांफ्रेंस में ब्लड बैंकों में रक्त की भारी कमी के तथ्य सामने आए हैं। डा. अग्रवाल के अनुसार कोरोना काल में प्रदेश ही नहीं बल्कि देश भर के ब्लड बैंकों में रक्त की भारी कमी है। उनका कहना है कि इससे ब्लड बैंक एवजी रक्त लिए बिना रक्त उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि डा. अग्रवाल ने कोरोना के प्रति जागरूकता अभियान को इसके लिए जिम्मेदार ठहराने से इनकार किया है।

जयपुर स्थित राजस्थान हॉस्पिटल से वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए डा. अग्रवाल ने बताया कि स्वास्थ्य कल्याण ब्लड बैंक से कोरोना काल से पहले प्रतिदिन 300 से ज्यादा रक्त यूनिट इश्यू की जा रही थी लेकिन रक्तदाताओं की कमी के चलते अब सिर्फ 50 से 75 यूनिट रक्त ही उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश के अन्य ब्लड बैंक की भी यही स्थिति है।

डा. अग्रवाल ने रक्तदाताओं से अपील की कि वे कोरोना सुरक्षा मानकों की पालना करते हुए इस मुश्किल समय में पीडित मानवता की सेवा में अपना योगदान पूर्व की भांति जारी रखें। उनका कहना है कि स्वास्थ्य कल्याण बैंक में बीमार और संक्रमित व्यक्तियों का प्रवेश नहीं होने से संक्रमण रहित वातावरण में रक्त लिया एवं दिया जाता है।

इसीलिए दिलाई धारा 144 में छूट

एक सवाल के जवाब में डॉ. अग्रवाल ने बताया कि कोरोना के कारण प्रदेश में धारा 144 लगी हुई है, लेकिन उनके प्रयासों से सरकार ने 26 नवम्बर से रक्तदान शिविरों को धारा 144 से मुक्त कर दिया है। इससे रक्तदान शिविर आयोजन की बाधा दूर हो गई है।

हर 15 दिन में करें प्लाज्मा का दान

डॉ. अग्रवाल के अनुसार एक बार कोरोना संक्रमण होने के बाद मरीजों के शरीर कोरोना से लड़ने को तैयार हो जाते हैं क्योंकि उनके शरीर में एंटीबॉडी बन जाते हैं जो उसे फिर संक्रमण से बचा लेते हैं। एक बार पॉजिटिव आया व्यक्ति 14 दिन में नेगेटिव आ जाता है। नेगेटिव आने के 14 दिन बाद 15 दिन में प्लाज्मा दान करके दो मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

डॉ. एस एस अग्रवाल ने बताया कि कोरोना मरीजों में ठीक होने के बाद भी श्वसन संबंधी अन्य बीमारियां घर कर लेती हैं। इन्हें कम करने के लिए राजस्थान हास्पिटल में पोस्ट कोविड रिहैविलिटेशन सेंटर स्थापित किया गया है। जहां पल्मोनरी डिजीज विशेषज्ञ डॉ शीतू सिह के नेतृत्व में 30 बिस्तर वाला डे केयर सेंटर संचालित किया जा रहा है। डॉ. एस एस अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि कोरोना वैक्सीन करीब तीन माह में यह मरीजों को मिल सकती है।

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