राजस्थान में एंड कास्मेटिक एक्ट का खुला उल्लंघन

जयपुर. राजस्थान में मानवीय जीवन बचाने के लिए रक्त मोलभाव के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। एक अस्पताल के स्थापना दिवस पर दिए गए विज्ञापन से ये संकेत मिले हैं।

जयपुर के मालवीय नगर स्थित रूंगटा अस्पताल ने अपने तीसवें स्थापना दिवस पर लगाए जाने वाले रक्तदान शिविर के एक अखबार में दिए गए विज्ञापन में लिखा है कि वह अगले छह माह तक पीआरबीसी (Packet red blood cell) केवल 675 रूपए में उपलब्ध कराएगा। विज्ञापन में बेहद छोटे अक्षरों में नियम एवं शर्तें लागू भी लिखा गया है।

भारत में ब्लड बैंकों पर लागू ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के मुताबिक ब्लड बैंकों पर विभिन्न कानून लागू होते हैं और उनकी अनुपालना जरूरी है। इनके तहत ब्लड बैंक ब्लड बेचने का विज्ञापन नहीं कर सकते लेकिन अस्पताल ने इसकी परवाह किए बिना अखबार में विज्ञापन साया करवाया है।

जहां तक इसके रेट आफर की बात है तो इंडियन रेडक्रास सोसायटी के डिप्टी सेक्रेट्री ने 7 जुलाई 2017 को एक आफिस आर्डर जारी करके कहा है कि प्राइवेट अस्पताल समूचे ब्लड की एक यूनिट का टेस्टिंग चार्ज 1450 रुपए से ज्यादा नहीं ले सकते। सेपरेशन के बाद ब्लड के अलग—अलग घटकों की टेस्टिंग कीमत भी इस आर्डर में लिखी गई है जिसके तहत एक यूनिट प्लाज्मा 400 रुपए, प्लेटलेट कंसंट्रेट के 400 रुपए लिए जाएंगे।

रेडक्रास सोसायटी का आदेश कहता है कि सेपरेशन के बाद टेस्टिंग का चार्ज उसी अनुपात में घटता चला जाएगा जिस अनुपात में रक्त के घटक अलग हुए हैं। रेडक्रास सोसायटी के आदेश की रोशनी में देखा जाए तो रूंगटा अस्पताल इस विज्ञापन के जरिए पीआरबीसी की एक यूनिट पर 250 रुपए तक का मुनाफा कमाएगा।

रक्त बैंक चला रहे एक ट्रस्ट पदाधिकारी के मुताबिक अगर विज्ञापन करने की परिपाटी शुरू हुई तो जयपुर सहित राजस्थान में रक्त की उपलब्धता का संकट खड़ा हो सकता है क्योंकि रक्त की उपलब्धता का एक बड़ा हिस्सा रक्तदान से आता है और रक्तदान के लिए आर्थिक प्रलोभन देना गैरकानूनी है। इसके बावजूद दान से मिले रक्त के एक घटक की कीमत छह माह तक कम करने का विज्ञापन सीधे-सीधे कानूनी जुर्म है और इसे रोका जाना चाहिए अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब जीवन बचाने के लिए रक्त हासिल करने से पहले मोलभाव करना होगा।

Leave a comment

Your email address will not be published.