नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में दो सौ सीट जीतने का दावा करने वाली भाजपा में तृणमूल के दागी और बागी नेताओं को शामिल करने के खिलाफ अंसतोष चरम पर है। तृणमूल के नेताओं को पार्टी में लाने की रणनीति से न सिर्फ वहां के कार्यकर्ता नाराज हैं बल्कि इसे लेकर आपस में झगड़ भी रहे हैं। इससे परेशान पार्टी ने अपने दो नेता सायंतन बसु और अग्निमित्र पाल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

टीएमसी के बाग़ी नेताओं को शामिल करने पर पार्टी के भीतर लगातार उठते सवालों के बीच पूछा जा रहा है कि जिन इलाक़ों में पार्टी मज़बूत है, वहाँ के तृणमूल नेताओं को भाजपा में क्यों शामिल किया जा रहा है? नए बनाम पुराने के विवाद को लेकर पश्चिम मेदिनीपुर और दुर्गापुर में बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच आपसी झड़पें भी हो चुकी हैं। इलाक़े में कई जगह टीएमसी के बाग़ी नेताओं को बीजेपी में शामिल करने के विरोध में पोस्टर भी लगाए गए हैं।

अगले विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी में शामिल होने वाले टीएमसी नेताओं की कतार लगातार लंबी होते देख बीजेपी के ज़मीनी नेता पार्टी के भीतर और बाहर खुल कर विरोध जता रहे हैं। उनको लगता है कि टीएमसी से आने वाले नेताओं को मलाईदार पद सौंपे जाएंगे और टिकटों बंटवारे में भी तरजीह मिलेगी।

पार्टी में बढ़ते असंतोष पर सार्वजनिक तौर पर बीजेपी के नेता कुछ कहने से बच रहे हैं। पार्टी-विरोधी गतिविधियों के तहत कार्रवाई के डर से कोई भी नेता सार्वजनिक रूप से कुछ कहने को तैयार नहीं है। एक असंतुष्ट नेता के अनुसार बंगाल बीजेपी में फ़िलहाल केंद्रीय नेतृत्व का शासन चल रहा है। किसको पार्टी में शामिल किया जाएगा और किसे नहीं, इसका फ़ैसला दिल्ली में ही किया जाता है। राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहे हैं कि सिर्फ़ दागियों और बागियों के सहारे टीएमसी का मुकाबला करने निकली भाजपा दो सौ से ज्यादा सीटें जीतने का दावा सपना साकार कर पाएगी!
ये सवाल निराधार नहीं हैं।

दो साल पहले टीएमसी से नाता तोड़ कर बीजेपी के पाले में जाने वाले मुकुल रॉय हों या फिर अमित शाह के दौरे के समय शनिवार को अपने दल-बल के साथ भगवा झंडा थामने वाले शुभेंदु अधिकारी, किसी का दामन उजला नहीं है। शारदा चिटफंड घोटाले में भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझने वाले इन दोनों नेताओं में से मुकुल रॉय पर तृणमूल कांग्रेस विधायक सत्यजित विश्वास की हत्या तक के आरोप हैं। हत्या की जांच करने वाली सीआईडी ने हाल में अदालत में जो पूरक आरोप पत्र दायर किया है उसमें रॉय का नाम भी शामिल है।

एक राजनीतिक विश्लेषक का कहना है कि बीजेपी फ़िलहाल खु़द को मज़बूत करने के बजाय दूसरे दलों को कमज़ोर करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। दागियों के पार्टी में शामिल होते ही उनके भ्राष्टाचार के पुराने रिकार्ड धूल जाते हैं। मिसाल के तौर पर शुभेंदु के पार्टी में शामिल होने के अगले दिन ही बीजेपी ने सोशल मीडिया से वह वीडियो हटा लिया जिसमें नारदा स्टिंग मामले में वे (शुभेंदु) पैसे लेते नज़र आ रहे थे।

Leave a comment

Your email address will not be published.