नई दिल्ली. असम के सीमावर्ती इलाकों में भूटानी नदियों के पानी से सिंचित असम के खेतों में धान की फसल इस बार पानी के लिए तरस रही है। भूटान ने कोरोना का हवाला देते हुए पानी के बहाव को रोक दिया है जिससे खेत प्यासे हैं।

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के साथ उलझी भारत सरकार की पेशानी पर इसी के चलते बल आ गए हैं क्योंकि भूटान ने पहली बार पानी के बहाव पर अंकुश लगाया है। उसने अपनी सीमा से लगे असम के गांवों में किसानों की जीवनरेखा कही जाने वाली कालानदी नदी का पानी रोक दिया है। कालानदी का पानी रोकने से इलाके के किसान परेशान हैं। जबकि भूटान सरकार का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से भूटान सरकार ने देश में बाहरी लोगों का प्रवेश बंद कर दिया है। उसका कहना है कि भूटान से निकलने वाले सिंचाई चैनलों का पानी इसी वजह से रोका गया है।

भूटान की कालानदी नदी को असम के सीमावर्ती बक्सा जिले के किसानों की जीवनरेखा कहा जाता है। उस नदी से निकलने वाली कृत्रिम नहर से जिले के 26 गावों के किसान सिंचाई करते हैं। वर्ष 1953 से किसान इसी नहर के पानी से धान की फसलों की सिंचाई करते आ रहे हैं। भूटान के इस फैसले से धान के खेत सूखने के कगार पर हैं। किसानों का कहना है कि वे हर साल धान के सीजन में कालानदी के पानी से खेती करते हैं। स्थानीय लोग हर साल वहां जाकर बांध की मरम्मत और नहर की साफ-सफाई करते हैं, लेकिन लॉकडाउन का हवाला देकर भूटान सरकार ने स्थानीय लोगों के सीमा पार जाने पर पाबंदी लगा दी। हर साल धान की बुवाई का सीजन शुरू होने से पहले स्थानीय किसान सीमा पार कर भूटान के सामद्रुप जोंखर जिले में जाकर इस नहर की साफ-सफाई और बांध की मरम्मत का काम करते थे ताकि पानी के बहाव में कोई रुकावट नहीं पैदा हो।

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