जयपुर. जिस मुर्गे की अनेकानेक डिश चाव से खाई जा रही थी, बर्ड फ्लू से उस मुर्गे के बुरे दिन आ गए हैं। अब से सौ ​रूपए किलो भी कोई नहीं खरीद रहा। जबकि पहले उसके दाम दो सौ रूपए तक होते थे। चिकन की खपत में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आ गई है।

वैसे राज्य में अभी तक पोल्ट्री में बर्ड फ्लू की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन इसके बावजूद चिकन कारोबार रसातल में जा पहुंचा है।जयपुर शहर में चिकन के दाम गिर गए हैं। जयपुर के चिकन कारोबारियों के अनुसार बर्ड फ्लू से पहले चिकन रेट एवरेज 180 रुपए किलो थे। अब इसके रेट 120 से 130 रुपए हो गए।

जयपुर में बर्ड फ्लू से पहले प्रतिदिन 85-90 हजार किलो चिकन बिकता था। अब उसकी बिक्री 60-65 हजार किलो रह गई है। अंडों की कीमत 22 प्रतिशत तक घट गई।
अजमेर में मुर्गी अंडों व ब्रोएलर (चिकन) के भावों में कमी हुई है। इससे करीब एक करोड़ का रोजाना नुकसान हो रहा है। हालांकि पोल्ट्री फार्म संचालक अलर्ट हैं। मुर्गियों की इम्युनिटी बढाने के लिए मल्टी विटामिन का ज्यादा उपयोग कर रहे हैं। पन्द्रह दिन में अंडे के रेट 5.80 रुपए से घटकर 3.50 रुपए तक रह गए। ब्रोएलर 110 रुपए किलो से घटकर 60 रुपए तक पहुंच गई।

बीकानेर में ही दो से ढाई हजार मुर्गों की बिक्री कम हो गई है। अंडों की बिक्री पर भी ग्रहण लगा है। बीकानेर में अजमेर से हर रोज साढ़े तीन हजार मुर्गियां आती हैं। अजमेर से मुर्गों को खरीदकर बीकानेर में बेचने वाले वालों के अनुसार आमतौर पर बीकानेर में साढ़े तीन हजार मुर्गों की बिक्री हर रोज होती थी। लेकिन बर्ड फ्लू के कारण करीब दो हजार मुर्गे कम बिक रहे हैं।

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