मुंबई. विधानपरिषद सदस्यों के नामांकन मामले में महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी फिर विवादों में घिर गए हैं। राज्य में सत्तारूढ गठबंधन का आरोप है कि राज्यपाल विपक्ष के नेता देवेन्द्र फडणवीस से मिलकर राज्य मंत्रिमंडल की ओर से भेजी गई सूची को दरकिनार करने की योजना बना रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी आए दिन विवादों में घिरते रहते हैं। वे मुख्यमंत्री की राजनीतिक धारा बदल जाने के सवाल को लेकर भी राजनीतिक दलों के निशाने पर आ गए थे। इससे पहले वे मुख्यमंत्री के विधानपरिषद सदस्य चुने जाने के मामले में भी शिवसेना के प्रहार झेल चुके हैं।
महाराष्ट्र के ग्रामीण विकास मंत्री हसन मुश्रीफ ने कहा कि राज्य के राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी और विपक्षी नेता देवेंद्र फडणवीस ने राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद के सदस्यों के नाम की सूची को दरकिनार करने का फैसला किया है।

मुश्रीफ ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि राज्यपाल के कोटे से विधान परिषद सदस्यों के रिक्त स्थान को पूरा करने के लिए राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में निर्णय लिया गया था और नामों की एक सूची राज्यपाल को दी गयी। विपक्षी नेता फडणवीस ने उन्हें बताया है कि कोशियारी के साथ एक बैठक हुई थी जिसमें 12 लोगों के नामों की भेजी गयी सूची से राज्यपाल सहमत नहीं हैं।

पाटिल ने कहा था दरकिनार कर दी जाएगी सूची !

ग्रामीण विकास मंत्री ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल के बयान से भी इस आरोप की पुष्टि होती है। पूर्व मंत्री विनय कोरे की मां के निधन पर उनके यहां शोक व्यक्त करने आये पाटिल ने कहा था कि उन्होंने और फडनवीस ने पहले ही बात की थी और कोशियारी के साथ भी बात कर निर्णय लिया गया था कि राज्य विधान परिषद के लिए नामित सदस्यों के 12 नामों की सूची को दरकिनार कर दिया जायेगा। मुश्रिफ ने कहा कि कोश्यारी का रवैया पूरी तरह से असंवैधानिक है और अगर राज्यपाल बाधा उत्पन्न करेंगे तो हम इसके खिलाफ अदालत में जाएंगे।
महाराष्ट्र में गत जून माह से राज्यपाल के कोटे वाली विधान परिषद की 12 सीटें रिक्त है। राज्यपाल संविधान के प्रावधानों के मुताबिक साहित्य, कला, सहकारिता एवं समाजसेवा से जुड़े 12 लोगों को विधान परिषद सदस्य के तौर पर नामित कर सकते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में सत्ताधारी दल इस अधिकार का इस्तेमाल राजनीतिक तौर पर करते रहे हैं।

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