जयपुर. पिंकसिटी का आयुर्वेद विश्वविद्यालय आयुर्वेद के उन ग्रंथों को डिजीटाइज करेगा जो हाथ से लिखे हुए हैं और उनमें आयुर्वेद दवाओं के दुर्लभ नुस्खे दर्ज हैं। भारत सरकार ने हाल ही जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को आयुर्वेद विश्वविद्यालय घोषित किया है। सरकार ने विश्वविद्यालय को मैन्युस्क्रिप्टोलॉजी के नोडल सेंटर का दर्जा भी दिया है।

आयुर्वेद विश्वविद्यालय के पहले वाइस चांसलर डॉ संजीव शर्मा के अनुसार संस्थान ऐसे दुर्लभ आयुर्वेद ग्रंथों का संग्रह करेगा जो हाथ से लिखे हुए हैं। राजस्थान और जयपुर में हाथ से लिखे ऐसे आयुर्वेद ग्रंथ बड़ी संख्या में लोगों के पास है। उन ग्रंथों को सुरक्षित किए जाने की आवश्यकता है। हाथ से लिखे ऐसे करीब 300 ग्रंथ राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान ने पहले ही संग्रहित कर रखे हैं।

शर्मा का कहना है कि लोगों को ऐसे दुर्लभ ग्रंथों को विश्वविद्यालय को दान में दे देना चाहिए ताकि उन्हें सुरक्षित रखा जा सके। अगर लोग ऐसा नहीं करना चाहते तो कुछ दिनों के लिए विश्वविद्यालय को दे दें ताकि उन्हें डिजीटाइज किया जा सके। ग्रंथों को डिजीटाइज करने के बाद लौटा दिया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के निदेशक रहे डॉक्टर संजीव शर्मा को राष्ट्रीय आयुर्वेद विश्वविद्यालय का पहला वाइस चांसलर नियुक्त किया गया है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को गत 9 नवंबर को विश्वविद्यालय का दर्जा मिला था और 13 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका वर्चुअल उद्घाटन किया था।

नए विश्वविद्यालय के पहले वाइस चांसलर डॉ संजीव शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के यूनिवर्सिटी बन जाने से यहां शैक्षणिक स्वतंत्रता मिलेगी। विश्वविद्यालय नए पाठ्यक्रम शुरू करने की श्रंखला में 6 नए पाठ्यक्रमों की शुरूआत करेगा। इसके लिए प्रक्रिया आरम्भ कर दी गई है। पाठ्यक्रमों में शार्ट और लोंग टर्म कोर्स शामिल होंगे।

विश्वविद्यालय अपने स्तर पर एडमिशन और परीक्षाएं आयोजित करेगा। विश्वविद्यालय में ऐसे कोर्सेज की शुरूआत की जाएगी जो भारत में कहीं भी संचालित नहीं है। उनमें एमएससी मर्म चिकित्सा, स्पोर्ट्स मेडिसिन जैसे विषय शामिल हैं। आयुर्वेद अर्थ विज्ञान के विशेषज्ञ इंटीग्रेटेड आधार पर इन कोर्सेज का संचालन करेंगे। दो साल की अवधि वाले इन कोर्सेज में अध्ययन करने वाले छात्रों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

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