नई दिल्ली. वॉट्सऐप अपनी प्राइवेसी पॉलिसी और इस्तेमाल की शर्तों में बदलाव यूरोप और अमेरिका से बाहर के क्षेत्र के लिए कर रहा है। अर्थात ‘यूरोपीय क्षेत्र’ के बाहर या भारत में रहने वालों पर ही ये प्राइवेसी पॉलिसी और शर्तों में बदलाव लागू होंगे क्योंकि यूरोप और अमेरिका में इंटरनेट, उसके असर, उस पर काम करने वाली कम्पनियों पर लगाम लगाने के लिए बेहद कड़े कानून हैं और भारत समेत एशियाई देशों के कानून इतने लचर हैं कि वे इन कम्पनियों पर अंकुश तो दूर उनसे किन्हीं गलतियों का मुआवजा तक लेने में सक्षम नहीं हैं।

असल में वॉट्सएप ने अमेरिका और यूरोप से बाहर के देशों में वाट्सएप इस्तेमाल करने वालों से कहा है कि अगर वे उसका इस्तेमाल जारी रखना चाहते हैं तो उन्हें वॉट्सएप प्राइवेसी पॉलिसी में बदलाव को स्वीकार करना होगा। नए अपडेट्स को आठ फ़रवरी, 2021 तक स्वीकार नहीं करने पर वॉट्सऐप अकाउंट डिलीट कर दिया जाएगा। नए नियमों और नए शर्तों को मंज़ूरी दिए बिना आठ फ़रवरी के बाद वॉट्सऐप इस्तेमाल नहीं कर सकते।

साइबर क़ानूनविज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स या ऐप्स इस तरह के कड़े क़दम नहीं उठाते हैं। आम तौर पर यूज़र्स को किसी अपडेट को ‘स्वीकार’ या अस्वीकार करने का विकल्प दिया जाता है। इसी के चलते वॉट्सऐप के इस ताज़ा नोटिफ़िकेशन ने विशेषज्ञों की चिंताएँ बढ़ा दी हैं।

चार जनवरी, 2021 को अपडेट की गई नई प्राइवेसी पॉलिसी में कहा गया है कि हमारी प्राइवेसी पॉलिसी से हमें अपने डेटा प्रैक्टिस को समझाने में मदद मिलती है। अपनी प्राइवेसी पॉलिसी के तहत हम बताते हैं कि हम आपसे कौन सी जानकारियाँ इकट्ठा करते हैं और इससे आप पर क्या असर पड़ता है। फ़ेसबुक ने साल 2014 में 19 अरब डॉलर में वॉट्सऐप को ख़रीदा था और सितंबर, 2016 से ही वॉट्सऐप अपने यूज़र्स का डेटा फ़ेसबुक के साथ शेयर करता आ रहा है।

अब वॉट्सऐप ने नई प्राइवेसी पॉलिसी में फ़ेसबुक और इससे जुड़ी कंपनियों के साथ अपने यूज़र्स का डेटा शेयर करने की बात का साफ़ तौर पर ज़िक्र किया है। वॉट्सऐप अपने यूज़र्स का इंटरनेट प्रोटोकॉल एड्रेस (आईपी एड्रेस) फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम या किसी अन्य थर्ड पार्टी को दे सकता है। वॉट्सऐप अब आपकी डिवाइस से बैट्री लेवल, सिग्नल स्ट्रेंथ, ऐप वर्ज़न, ब्राइज़र से जुड़ी जानकारियाँ, भाषा, टाइम ज़ोन फ़ोन नंबर, मोबाइल और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी जैसी जानकारियाँ भी इकट्ठा करेगा।

मोबाइल से सिर्फ़ वॉट्सऐप डिलीट करने की अपेक्षा ‘माई अकाउंट’ सेक्शन में जाकर ‘इन-ऐप डिलीट’ का विकल्प चुनना होगा अन्यथा आपका पूरा डेटा वॉट्सऐप के पास रह जाएगा। नई प्राइवेसी पॉलिसी में वॉट्सऐप ने साफ़ किया है कि उसका मुख्यालय और डेटा सेंटर अमेरिका में है इसलिए ज़रूरत पड़ने पर यूज़र्स की निजी जानकारियों को वहाँ ट्रांसफ़र किया जा सकता है। सिर्फ़ अमेरिका ही नहीं बल्कि जिन भी देशों में वॉट्सऐप और फ़ेसबुक के दफ़्तर हैं, लोगों का डेटा वहाँ भेजा जा सकता है।

नई पॉलिसी के मुताबिक़ भले ही आप वॉट्सऐप का ‘लोकेशन’ फ़ीचर इस्तेमाल न करें, आपके आईपी एड्रेस, फ़ोन नंबर, देश और शहर जैसी जानकारियाँ वॉट्सऐप के पास होंगी। अगर आप वॉट्सऐप का बिज़नेस एकाउंट इस्तेमाल करते हैं तो आपकी जानकारी फ़ेसबुक समेत उस बिज़नेस से जुड़े कई अन्य पक्षों तक पहुँच सकती है। वॉट्सऐप ने भारत में पेमेंट सेवा शुरू कर दी है और ऐसे में अगर आप इसका पेमेंट फ़ीचर इस्तेमाल करते हैं तो वॉट्सऐप आपकी कुछ और निजी डेटा इकट्ठा करेगा। मसलन, आपका पेमेंट अकाउंट और ट्रांज़ैक्शन से जुड़ी जानकारियां।

प्राइवेसी पॉलिसी बदलने से आप जो मैसेज, वीडियो, ऑडियो और डॉक्युमेंट वॉट्सऐप के ज़रिए एक-दूसरे को भेजते हैं, उनके बारे में साइबर और टेक्नॉलजी लॉ विशेषज्ञों का कहना है कि ॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी यूज़र्स को ‘आग ’ में घसीटने जैसी है। वॉट्सऐप की नई पॉलिसी न सिर्फ़ भारतीयों की निजता का संपूर्ण हनन है बल्कि भारत सरकार के क़ानूनों का उल्लंघन है। वॉट्सऐप जानता है कि भारत उसके लिए कितना बड़ा बाज़ार है। साथ ही वॉट्सऐप ये भी जानता है कि भारत में साइबर सुरक्षा और निजता से जुड़े ठोस क़ानूनों का अभाव है।

वॉट्सऐप भारत में अपने पाँव तेज़ी से पसारना चाहता है क्योंकि भारतीयों का निजी डेटा इकट्ठा करने और उसे थर्ड पार्टी तक पहुँचाने के लिए उसे किसी तरह की रोक-टोक का सामना नहीं करना पड़ेगा। जुलाई 2019 तक भारत में वॉट्सऐप के 40 करोड़ यूज़र्स थे। भारत में न ही साइबर सुरक्षा से जुड़ा कोई मज़बूत क़ानून है, न ही पर्सनल डेटा प्रोक्टेशन से जुड़ा और न ही प्राइवेसी से जुड़ा। भारत में एकमात्र प्रोद्यौगिकी सूचना क़ानून (आईटी ऐक्ट), 2000 है। लेकिन ये सेक्शन 79 भी वॉट्सऐप जैसे सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए काफ़ी लचीला है।

विशेषज्ञों के अनुसार वॉट्सऐप की नई प्राइवेसी पॉलिसी आईटी एक्ट का उल्लंघन है। इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलजी इंटमिडिएरी गाइडलाइंस रूल्स, 2011 और इन्फ़ॉर्मेशन टेक्नॉलजी रीज़नेबल सिक्योरिटी पैक्टिसेज़ ऐंड प्रोसीज़र्स ऐंड सेंसिटिव पर्सनल डेटा ऑफ़ इन्फ़ॉर्मेशन रूल्स, 2011 की धारा ए और धारा 75 के अनुसार अगर कोई सर्विस प्रोवाइडर भारत के बाहर स्थित है लेकिन उसकी सेवाएँ भारत में कंप्यूटर या मोबाइल फ़ोन पर भी उपलब्ध हैं तो वो भारतीय आईटी ऐक्ट के अधीन भी हो जाएगा लेकिन वॉट्सऐप का कहना है कि वह एक अमेरिकी कंपनी है और इसका मुख्यालय अमेरिका के कैलीफ़ोर्निया राज्य में स्थित है। इसलिए ये कैलीफ़ोर्निया क़ानूनों के अधीन है।

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