नई दिल्ली. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता को लेकर नए प्रतिबंध लगा दिए। ये प्रतिबंध आगामी राष्ट्रपति जो बाइडन की चीन के साथ कूटनीति को और मुश्किल कर सकते हैं। उन्हें 20 जनवरी को पदभार संभालना है जिसमें अब एक हफ्ते से भी कम समय है। ट्रंप प्रशासन ने अपने शासन के अंतिम दिनों में चीन के कई अधिकारियों और उनके परिवारों पर यात्रा प्रतिबंध लगाए हैं।

प्रशासन ने यह भी कहा कि वह चीन की सरकारी तेल कंपनी “चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन“ को उन कंपनियों की सूची में शामिल कर रहा है जिसके साथ अमेरिकी नागरिक कारोबार नहीं कर सकते। विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि हम तब तक कार्रवाई करना जारी रखेंगे जब तक बीजिंग दक्षिण चीन सागर में आक्रामक व्यवहार करना बंद नहीं करता है।

उधर अमेरिका ने यमनी विद्रोहियों के आतंकवादी होने की घोषणा वापस लेने की संरा की अपील ठुकरा दी है। संयुक्त राष्ट्र प्रमुख तथा शीर्ष अधिकारियों ने अमेरिका से यमन के ईरान समर्थित विद्रोहियों को आतंकवादी संगठन घोषित करने का फैसला वापस लेने की अपील की, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ठुकरा दिया।

अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने हूती विद्रोहियों को एक ‘विदेशी आतंकवादी संगठन’ घोषित कर दिया था। यह फैसला 19 जनवरी से लागू होगा, जो राष्ट्रपति कार्यालय में ट्रंप का आखिरी दिन है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन 20 जनवरी को पदभार संभालेंगे।

संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के प्रमुख मार्क लोकॉक ने सुरक्षा परिषद को आगाह किया है कि अमेरिका के इस कदम से आकाल की ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो पिछले 40 वर्ष में नहीं देखी गई होगी। यमन की 30 करोड़ की आबादी में से 1.6 करोड़ लोगों को अकाल का सामना करना पड़ेगा। इस कदम के बाद कई कम्पनियों के यमन से बाहर जाने के संकेत मिल रहे हैं।

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