नई दिल्ली. कोरोना वायरस को लेकर एक ऐसी डरावनी खबर आई है जिसे जानकर दुनिया के होश उड़ जाएंगे। असल में कोरोना वायरस बदल रहा है और बदलता ही चला जा रहा है। वह उन चीजों को अपना रहा है जो उसके फैलने और विकसित होने के लिए उपयोगी और मददगार हैं।

कोरोना वायरस दिसंबर 2019 में पहली बार चीन के वुहान में दिखा और देखते ही देखते पूरी दुनिया में फैल गया। वायरस फैलने के लिए प्रतिकृति बनाता जाता है और उसके कंधों पर चढ़कर इंसानों में फैलता चला जाता है। शोधकर्ताओं ने चौंकाने वाला खुलासा किया है कि वायरस बदलाव कर स्थिर रहने की कोशिश कर रहा है।

हो रहे हैं नए म्युटेशन

बदलावों को समझने के लिए वायरस के प्रोटीओम में आ रही म्युटेशन को ट्रैक किया गया है। प्रोटीओम वायरस में जेनेटिक मैटेरियल से घिरा प्रोटीन का भंडार होता है। शोधकर्ताओं के अनुसार अभी भी वायरस में नए म्युटेशन हो रहे हैं। वायरस नए क्षेत्रों के अनुकूल बनने की कोशिश कर रहा है। अलबत्ता कुछ क्षेत्रों में इसकी म्युटेशन की दर धीमी भी होकर प्रमुख प्रोटीन के आसपास सिमट रही है।

उभरा प्रोटीन बनाता है ताज

वायरस में आए बदलाव (म्युटेशन) की दर शुरू में काफी तेज थी। पर अप्रैल के बाद उसकी रफ्तार में कमी आ गई है। वायरस के स्पाइक में मौजूद प्रोटीन कोविड-19 के ऊपरी हिस्से में उभरे होते हैं जो उसे ताज का रूप देते हैं। स्पाइक की साइट 614 में मौजूद अमीनो एसिड, एस्परिक एसिड से ग्लाइसिन में बदल गया था।
स्पाइक में मौजूद प्रोटीन दो तरह से काम करता है। वह मानव कोशिकाओं से वायरस को जुड़ने में मदद करता है और वायरस में मौजूद जेनेटिक मैटेरियल आरएनए को वायरस की नक़ल में पहुंचाता है।

कॉपी बनाकर आक्रमण की रफ्तार बढ़ा देता है वायरस

म्युटेशन से बीमारी का असर कितना बढ़ता है इस पर शोध होना बाकी है, लेकिन एक बात स्पष्ट है कि म्यूटेशन की वजह से वायरस इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश कर पाता है। म्युटेशन अलग-अलग अणुओं में होती हैं, लेकिन एक ही तरह से विकसित होती हैं।
शोध के अनुसार न्यूक्लियोकैप्सिड प्रोटीन में सबसे ज्यादा म्युटेशन हो रहा है। ये प्रोटीन मेजबान सेल में प्रवेश करने के बाद वायरस के आरएनए को इकठ्ठा करता है। दूसरा 3ए वायरोपोरिन प्रोटीन है जो होस्ट सेल में छेद बना देता है, जिसकी मदद से वायरस उसमें पहुंचकर कॉपी बनाता है और उसे आक्रामक बना देता है।

43 करोड़ शरीरों में कर चुका है प्रवेश

शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रोटीन में आ रहा बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वायरस तेजी से प्रसार में सुधार के तरीके तलाश रहा है। ये शोध जर्नल इवोल्यूशनरी बायोइनफॉरमैटिक्स में प्रकाशित हुआ है।
गौरतलब है कि दुनिया भर में 43 करोड़ से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। जबकि यह अब तक 11,66,174 लोगों की जान ले चुका है। भारत में वायरस के चलते अब तक 119,502 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 79 लाख से भी ज्यादा लोग गिरफ्त में आ चुके हैं। वायरस दुनिया के 215 देशों में फैल चुका है।

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