भारत में आज भी जिंदा है मुगलों की अय्याशी

नई दिल्ली. जिन मुगलों की याद इन दिनों देशद्रोह के समान है, उन मुगलों की जीवनशैली को भारत के उद्योगपतियों के घरों में कभी भी देखा जा सकता है क्योंकि ठाठ बाट में उन्होंने मुगलों को भी पीछे छोड़ दिया है।

अमेरिका के 44वें राष्ट्रपति रहे ओबामा ने अपनी किताब ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के साथ अपनी मुलाकात और अनौपचारिक बातचीत का जिक्र करते हुए भारतीय उद्योगपतियों की इसी ठाठ भरी जिंदगी की चर्चा की है।

भारत के राजनेताओं के लिए आसान है दोहन

किताब में लिखा है कि सहयोगियों के बिना हुई बातचीत के दौरान सिंह ने उनसे कहा कि अनिश्चितता भरे समय में, राष्ट्रपति महोदय, धार्मिक और जातीय एकजुटता का आह्वान बहकाने वाला हो सकता है और भारत में या कहीं भी राजनेताओं के लिए इसका दोहन करना बहुत कठिन नहीं है।

ओबामा ने लिखा कि प्राग यात्रा के दौरान (चेकोस्लोवाकिया के पूर्व राष्ट्रपति) वक्लाव हवेल के साथ हुई बातचीत और यूरोप में असमानता के बढ़ते प्रकोप के बारे में उनकी चेतावनी याद की। यदि वैश्वीकरण और ऐतिहासिक आर्थिक संकट अपेक्षाकृत सम्पन्न देशों में इन रूझानों को बढ़ा रहे हैं और अगर अमेरिका में भी मैं इसे अनुदारवादी वित्तकोषीय आंदोलन में देख सकता हूं तो भारत इससे कैसे बच सकता है?

लाखों बदहाल बस्तियों में सिसक रही है जिंदगी

ओबामा ने लिखा, देशभर में लाखों लोग गंदगी और गिलाजत में रह रहे हैं, अकालग्रस्त गांवों या बदहाल झुग्गी-बस्तियों में जीवन बसर कर रहे हैं। वहीं भारतीय उद्योग के महारथी ऐसा जीवन जी रहे हैं कि इससे राजाओं और मुगलों को भी ईर्ष्या हो जाए।

पाकिस्तान को कोसो, राष्ट्र एकजुट हो जाएगा

पाकिस्तान के प्रति शत्रुता भाव व्यक्त करना राष्ट्र को एकजुट करने का सबसे आसान रास्ता है। ढेर सारे भारतीयों को इस बात पर गर्व है कि पाकिस्तान का मुकाबला करने के लिए देश ने परमाणु हथियार कार्यक्रम विकसित किया। उन्हें इस हकीकत की कोई परवाह नहीं है कि किसी भी तरफ से कोई चूक क्षेत्र का विनाश कर सकती है।

किताब में ओबामा ने 2008 के चुनाव प्रचार अभियान से लेकर पहले कार्यकाल के अंत में एबटाबाद (पाकिस्तान) में अलकायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मारने के अभियान तक की अपनी यात्रा का विवरण दिया है। इस किताब के दो भाग हैं। पहला भाग मंगलवार को दुनियाभर में जारी हुआ।

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