नई दिल्ली. चीनी चालाकियों का अंत नहीं है। भारत ने जैसे ही उसके उत्पादों के आयात पर निगरानी बढ़ाई, उसने भारत के बाजारों को अन्य देशों के रास्ते होने वाले आयात मार्ग का इस्तेमाल करके पाट दिया। भारतीय विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए गठित मंत्रियों के एक समूह ने अपनी रिपोर्ट में इसे रेखांकित किया है कि मौजूदा शुल्कों और सरकार की तरफ से लगाए तमाम प्रतिबंधों को धता बताते हुए भारतीय बाजार में चीनी उत्पादों की बाढ़ आ गई है।

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक रिपोर्ट में कहा गया है कि अन्य देशों के साथ भारत के व्यापार समझौतों का फायदा उठाने के लिए सोयाबीन से लेकर टेलीफोन संबंधी उपकरण और वाहनों से लेकर उनके कलपुर्जे तक जैसे तमाम चीनी उत्पाद दूसरे देशों के रास्ते यहां के बाजार में भेजे जा रहे हैं। फुटवियर, कपड़े, चमड़े, घड़ियां और चार्जर्स जैसे बिजली के उपकरण के सेगमेंट में तो तमाम नामी ब्रांड के नकली या कमतर गुणवत्ता वाले उत्पादों को भारतीय बाजार में भेजा जा रहा है। इनमें से अधिकांश वस्तुओं को चीन से आयात किया जाता है।

मंत्रिसमूह ने नियमों का दुरुपयोग रोकने और सख्त कार्रवाई की वकालत करते हुए भारत सामरिक व्यापार एजेंसी (आईएसटीए) बनाने का प्रस्ताव दिया है। रिपोर्ट में नकली उत्पादों के आयात को सीमित करने के लिए निर्धारित एचएस कोड की जांच कड़ी करने का सुझाव दिया गया है।

चीन से आने वाले वाहन और उसके कलपुर्जों के आयात पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाए जाने के बावजूद सिंगापुर और हांगकांग से उनके आयात में उछाल आ गया है। दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र समझौते या साफ्टा के गठन के बाद नेपाल और बांग्लादेश से सोयाबीन तेल के आयात में भारी उछाल भी सरकार की चिंता को बढ़ा रहा है। 2016-17 के बाद से सोयाबीन तेल आयात में 23,500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।सोयाबीन को नेपाल या बांग्लादेश के रास्ते चीन से भेजा जा रहा था।

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