नई दिल्ली. थाइलैंड के अमरूदों ने भारत के बाजारों से देसी अमरूदों को खदेड़ना शुरू कर दिया है। थाईलैंड का अमरूद क्रंची होने के साथ ही कम मीठा होता है, इसलिए मधुमेह पीड़ितों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

असल में भारत के अधिकांश अमरूदों का गूदा मुलायम और अति मीठा होता है। जबकि थाई अमरूदों का गूदा क्रंची होने के साथ ही कम मीठा होता है। हालांकि स्वाद में भारतीय अमरूदों के मुकाबले थाई अमरूद कहीं नहीं ठहरता लेकिन क्रंची होने से उसका गूदा ज्यादा पसंद किया जाता है।

कम मीठा होने से मधुमेह पीड़ित थाई अमरूदों को अधिक पसंद कर रहे हैं। इसका अंदाजा सिर्फ इससे लगाया जा सकता है कि थाईलैंड से अमरूदों का आयात लगभग दोगुना हो गया है और भारतीय बाजारों में 150 से 200 रूपए प्रति किलो बिक रहा है। इसके अलावा थाई अमरूद फ्रिज में रखे बिना दस दिन तक ताजा बना रहता है जबकि भारतीय अमरूद दूसरे दिन ही मुरझाना शुरू कर देता है और तीसरे-चौथे दिन उसमें सड़न शुरू हो जाती है।

थाई अमरूदों के भारतीय बाजारों पर कब्जे से चिंतित केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ ने भारतीय अमरूदों को क्रंची बनाने की परियोजना हाथ में ली है। इसके तहत क्रंची अमरुद की किस्म विकसित करने का काम शुरू कर दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि केन्द्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान अब तक अमरूदों की ललित, श्वेता और धवल किस्म विकसित कर चुका है। इन किस्मों को भारत के लगभग सभी राज्यों में उपजाया जाता है।असल में विटामिन सी और बायोएक्टिव तत्वों युक्त अमरूद की मांग लगातार बढ़ रही है। ललित किस्म के अमरूद में न केवल विटामिन सी बल्कि लाइकोपीन भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। लाइकोपीन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ ही कैंसर का खतरा कम करता है।

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