नई दिल्ली. कई महीनों से नानुकुर करता आ रहा चीन आखिरकार इस बात के लिए तैयार हो गया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ कोरोना वायरस महामारी की उत्पत्ति की जांच शुरू करने के लिए वुहान शहर का दौरा करें। वुहान में ही 2019 के दिसंबर में सबसे पहले वायरस का पता चला था।

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि विशेषज्ञ 14 जनवरी को वुहान पहुंचेंगे। उनके कार्यक्रम का अन्य ब्योरा नहीं दिया गया है। क्योंकि चीन सरकार के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने यह जानकारी नहीं दी है।

असल में इस दौरे की कई महीने से उम्मीद की जा रही थी और इसमें देरी पर डब्ल्यूएचओ प्रमुख टेड्रोस अधानम घेब्रेयेसस ने पिछले सप्ताह निराशा प्रकट की थी। उन्होंने कहा था कि दौरे को अंतिम रूप देने में लंबा समय लग रहा है।

चीन के डब्ल्यूएचओ के अधिकारियों के दौरे की घोषणा करने के बाद टेड्रोस ने कहा कि अनेक देशों के वैज्ञानिक इस बात पर ध्यान केंद्रित करेंगे कि कोरोना वायरस सबसे पहले मनुष्य तक कैसे पहुंचा। शुरुआती मामलों में संक्रमण के संभावित स्रोत का पता लगाने के लिए वुहान में अध्ययन शुरू होंगे।

चीन स्वतंत्र जांच की मांग को खारिज करता रहा है। वहीं कोरोना वायरस की उत्पत्ति के मामले में सभी अध्ययनों पर सख्ती से नियंत्रण रख रहा है। वह इस तरह की धारणाओं को भी हवा दे रहा है कि कहीं बाहर से चीन में यह वायरस आया हो सकता है।

डब्यूएचओ महानिदेशक के सलाहकार डॉ. ब्रूस एल्वर्ड ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी को उम्मीद है कि विश्व के कुछ गरीब देशों में इस माह के अंत या फरवरी में कोरोना वायरस का टीकाकरण शुरू हो सकता है। साथ ही उन्होंने विश्व समुदाय से यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक प्रयास करने को कहा कि सभी देशों में टीका पहुंचे।

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