कोरोना प्रकोप का असर

नई दिल्ली. कोरोना वैक्सीन दुनिया की चुनिन्दा फार्मा कम्पनियों को मालामाल करने का रास्ता प्रशस्त करेगी क्योंकि दुनिया भर की सरकारें इस वक्त कोरोना से बचाव के लिए मुंहमांगी कीमत देने के लिए अपने खजाने खोलकर बैठी हैं।

निवेश विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिकी बायोटेक कंपनी मॉडर्ना और जर्मनी की बायो-एन-टेक साझेदार कंपनी, अमेरिका की फ़ाइज़र से मिलकर अगले साल अरबों डॉलर का व्यापार करेंगी। महामारी के दौर में वैक्सीन की ज़रूरत को देखते हुए सरकार और फ़ंड देने वालों ने वैक्सीन बनाने की योजना और परीक्षण के लिए अरबों पाउंड की राशि दी। गेट्स फ़ाउंडेशन जैसे संगठनों ने खुले दिल से इन योजनाओं का समर्थन किया।

इसके अलावा कई लोगों ने ख़ुद भी आगे आकर इन योजनाओं का समर्थन किया। अलीबाबा के फ़ाउंडर जैक मा और म्यूज़िक स्टार डॉली पार्टन ने भी आगे आकर इन योजनाओं के लिए फ़ंड दिया। साइंस डेटा एनालिटिक्स कंपनी एयरफ़िनिटी के मुताबिक कोविड टीका बनाने के लिए सरकारों ने 6.5 बिलियन पाउंड दिये। गैर-लाभार्थी संगठनों ने भी 1.5 बिलियन पाउंड दिया। कंपनियों के ख़ुद के निवेश से सिर्फ़ 2.6 बिलियन पाउंड ही आए।

जानकारी के अनुसार फ़्लू जैसी बीमारियों के लिए बनी वैक्सीन का बाज़ार अरबों का है। अगर कोविड-19 फ़्लू की तरह ही बना रहा और इसके लिए सालाना टीका लगाने की ज़रूरत पड़ती रही तो वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां धन के देवता कुबेर को भी पीछे छोड़ देंगी। फिलहाल वैक्सीन बना रही कम्पनियों में से एस्ट्राज़ेनेका की वैक्सीन 4 डॉलर अर्थात रुपए में क़रीब 300 रुपये प्रति डोज़ में उपलब्ध होगी। मॉडर्ना के प्रति डोज़ की क़ीमत क़रीब 37 डॉलर यानी दो हज़ार सात रुपये से कुछ अधिक होगी।

एस्ट्राज़ेनेका ने सिर्फ़ महामारी तक क़ीमतें कम रखने का वादा किया है। माना जा रहा है कि अभी अमीर देशों की सरकारें अधिक क़ीमत देंगी। वे वैक्सीन या डोज़ को लेकर इतनी उतावली हैं कि बस कैसे भी महामारी का अंत कर सकें। अभी दुनिया भर में 50 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल के दौर में हैं। आने वाले दो सालों में बाज़ार में 20 वैक्सीन उपलब्ध हो सकती हैं।

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