नई दिल्ली. अल्पसंख्यक शिया हजारा समुदाय के 11 लोगों की हत्या के विरोध में पाकिस्तान के कराची में विरोध प्रदर्शन किया गया। हजारों लोगों ने रास्ते जाम कर दिए। प्रदर्शनों के चलते 17 स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद करनी पड़ीं और 25 फ्लाइट देर से रवाना हुईं।

पाकिस्तानी पुलिस के अनुसार गत सप्ताह क्वेटा के नजदीक मच्छ कस्बे में कोयला खदान में काम कर रहे 11 शिया हजारा समुदाय के मजदूरों का अपहरण कर उनकी हत्या कर दी गई। आतंकी संगठन आइएस ने हत्याओं की जिम्मेदारी ली। इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई और पाकिस्तान में भारी विरोध हुआ।

ये विरोध प्रदर्शन तब हो रहे हैं, जब संयुक्त विपक्ष इमरान सरकार से इस्तीफे की मांग कर रहा है। कराची में शहर के मध्य नुमाइश चौरंगी पर धरना दिया गया जिसमें राजनीतिक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रमुख लोगों ने हिस्सा लिया। गवर्नर हाउस पर मजलिस-ए-मुस्लेमीन का धरना अभी तक जारी है। धरने में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

घटना के विरोध में सिंध बार काउंसिल ने अदालतों का बहिष्कार किया। शिया हजारा समुदाय के लोगों की सामूहिक हत्या के बाद पाकिस्तान में पश्तून समुदाय के साथ हो रहे अन्याय की आवाज भी तेज हो गई है। समुदाय के सैकड़ों लोग सरकारी एजेंसियों खासतौर से खुफिया संगठन आइएसआइ की गैरकानूनी हिरासत में हैं।

पश्तून तहाफ्फुज मूवमेंट के नेता और संसद सदस्य अली वजीर को घृणास्पद भाषण देने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है। एक अन्य पश्तून नेता आलम मेहसूद को घर में ही नजरबंद कर दिया गया है। सना एजाज नाम की मानवाधिकार कार्यकर्ता को उनके 45 सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया गया है। माना जा रहा है कि चीन-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरीडोर की परियोजनाओं के विरोध के चलते पश्तूनों का चीन के इशारे पर दमन किया जा रहा है।

Leave a comment

Your email address will not be published.