नई दिल्ली. पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत चीन के लिए सिरदर्द बन गया है। इस प्रांत में चीन—पाकिस्तान कॉरिडोर के तहत स्थापित की जाने वाली परियोजनाओं पर बलूच विद्रोहियों के हमले ने पाकिस्तानी सेना की नाक में भी दम कर रखा है क्योंकि पाकिस्तानी सेना के जिम्मे ही कॉरिडोर परियोजनाओं की सुरक्षा का जिम्मा है।

लगभग एक पखवाड़े पहले दिसम्बर 2020 में पाकिस्‍तान के दक्षिणी पश्चिमी प्रांत बलूचिस्‍तान में पाकिस्‍तानी सेना को एक हमले में 7 जवान गंवाने पड़े थे। ये जवान चीनी सहयोग वाली परियोजनाओं की सुरक्षा में तैनात थे।

ग्वादर है बलूच विद्रोहियों का निशाना

उल्लेखनीय है कि चीन पाकिस्तान के जिस ग्वादर बंदरगाह का विकास कर रहा है, बलूचिस्तान में है और बलूच विद्रोहियों के खास निशाने पर है। बलूच विद्रोहियों के हमलों के चलते ग्‍वादर पोर्ट और फ्री ट्रेड जोन में अरबों डॉलर का चीनी निवेश संकट में आ गया है।

पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार बलूचिस्‍तान क्षेत्रफल में पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है। बलूच आबादी पाकिस्तान की कुल जनसंख्या का 9 फीसदी है। पिछले कई दशक से सक्रिय बलूच विद्रोहियों कीपश्‍तूनों के साथ प्रतिस्‍पर्द्धा रही है। पंजाबियों से भी बलूचों का संघर्ष बहुत पुराना है।

चीनियों को निशाना बना रहे हैं बलूच विद्रोही

बलूच विद्रोहियों के हमलों में हाल ही तब तेजी आई जब पाकिस्‍तान के अधिकारियों ने चीन को खुश करने के लिए दमन शुरू कर दिया। इससे हिंसा का नया दौर शुरू हो गया जिसने चीन के विश्‍वास को हिलाकर रख दिया है। बलूच विद्रोही फिर से एकजुट होकर नई रणनीति बना रहे हैं। विद्रोही चीनियों को भी निशाना बना रहे हैं।

बलूच विद्रोही तीन साल पहले कराची में चीनी वाण‍िज्‍य दूतावास और दो वर्ष पूर्व ग्‍वादर के चीन निर्मित पर्ल होटल को निशाना बना चुके हैं। इस होटल में अक्‍सर चीनी नागरिक रुकते हैं। कराची के स्‍टॉक एक्‍सचेंज को दहला दिए जाने के बाद स्पष्ट हो यगा कि बलूच विद्रोहियों के निशाने पर चीन के वित्‍तीय, व्‍यवसायिक और आध‍िकारिक हित हैं।

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