इमरान और विपक्ष के बीच चल रहा है युद्ध

नई दिल्ली. जिस प्रकार भारत के राजनीतिज्ञ हर मामले में पाकिस्तान को घसीट लाते हैं, वैसे ही पाकिस्तानी सियासतदां भी राजनीति के लिए भारत का नाम लेने से नहीं चूकते। इसी के चलते पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते ब्रॉडशीट स्कैम का मामला छाया रहा। Pakistani leaders corruption

पाकिस्तान में भी विपक्षियों के खिलाफ एजेंसियों का इस्तेमाल

ब्रॉडशीट एलएलसी के पास पाकिस्तानी नेताओं के विदेशी खातों का पता लगाने का ठेका है लेकिन पाकिस्तान सरकार ने उसे काम के बदले तय कमीशन नहीं दिया था। जिसके विरोध में कम्पनी लंदन की एक अदालत में चली गई थी और अदालत के आदेश पर लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग को कम्पनी को बकाया का भुगतान करना पड़ा। इससे पहले ब्रॉडशीट कम्पनी ने कहा था कि पाकिस्तानी सरकार की रूचि सम्पत्ति को वापस लाने में कम और विपक्षी नेताओं के खातों की डिटेल जानने में अधिक है। इसी के साथ पाकिस्तानी अखबारों की सुर्खियों पर इस स्कैम ने कब्जा कर लिया। मामले ने इतना तूल पकड़ लिया है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सुप्रीम कोर्ट के एक रिटायर्ड जज जस्टिस अज़मत सईद की अध्यक्षता में जांच कमेटी का गठन कर दिया है। लेकिन विपक्ष ने कमेटी के अध्यक्ष पर ही सवाल उठा दिए हैं। Pakistani leaders corruption

भारत जैसी ही होती हैं जांच समिति

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज़) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने कहा है कि उन्हें जस्टिस अज़मत सईद पर भरोसा नहीं है क्योंकि अज़मत सईद इमरान ख़ान के एक ट्रस्ट के ज़रिए चलाए जा रहे शौकत ख़ानम अस्पताल के बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में शामिल हैं। जस्टिस अज़मत जजों की उस बेंच में शामिल थे जिन्होंने नवाज़ शरीफ़ को भ्रष्टाचार के मामले में दोषी क़रार दिया था। Pakistani leaders corruption

इसके अलावा जब ब्रॉडशीट कंपनी से पाकिस्तानी सरकार का समझौता हुआ था तब पाकिस्तान की ओर से समझौते पर दस्तख़त करने वाले संगठन नेशनल अकाउंटिबिलिटी ब्यूरो (नैब) के पूर्व डिप्टी प्रॉसिक्यूटर जनरल रह चुके हैं। Pakistani leaders

नवाज शरीफ के 80 करोड़ डालर का बताया था पता

इमरान का कहना है कि ब्रॉडशीट कंपनी ने नवाज़ शरीफ़ की 80 करोड़ डॉलर की संपत्ति का पता लगाया और समझौते के मुताबिक़ सरकार ने कंपनी को पैसे दिए और अगर पैसे नहीं दिए जाते तो पाँच हज़ार पाउंड प्रतिदिन की दर से ब्याज देना पड़ता। पाकिस्तान में राजनीतिक दलों की विदेशी फ़ंडिंग को लेकर मामला इन दिनों सुर्खियों में है दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री और मुस्लिम लीग (नवाज़) के नेता नवाज़ शरीफ़ ने सत्तारूढ़ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के खिलाफ जारी विदेशी फ़ंडिग केस पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि यह मामला छह साल से लटका हुआ है और चुनाव आयोग इस पर क्यों नहीं फ़ैसला कर रहा है। Pakistani leaders corruption

इमरान के खातों पर भी उठ रहे हैं सवाल

विपक्ष का दावा है कि स्टेट बैंक ऑफ़ पाकिस्तान ने चुनाव आयोग को पीटीआई के 23 बैंक खातों की जानकारी दी है जिनमें बाहर से पैसे आते थे, लेकिन इमरान ख़ान ने इनमें से 15 बैंक खातों की जानकारी चुनाव आयोग को दी ही नहीं। उधर पीडीएम के संयोजक और जमीयत उलेमा-ए-पाकिस्तान के अध्यक्ष मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा है कि इमरान ख़ान को सत्ता में लाने के लिए भारत और इसराइल से फ़ंडिंग की गई। मौलाना ने कहा कि मौजूदा प्रधानमंत्री यहूदियों के एजेंट हैं जिनको सत्ता में लाने के लिए दुनिया के दूसरे देशों के साथ पाकिस्तान के दुश्मन देश भारत और इसराइल से भी फ़ंडिंग की गई। Pakistani leaders

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