कतार में रहते हैं विदेशी सेनाओं के अफसर

नई दिल्ली. दुनिया के सबसे ऊंचे रणक्षेत्रों में दुश्मन को अनेकों बार धूल चटा चुकी भारतीय सेना की प्रतिष्ठा इतनी बढ़ गई है कि उसके नेशनल डिफेंस कालेज में दुनिया के अन्य देशों की सेनाओं के अफसर प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं। इसी के चलते नेशनल डिफेंस कॉलेज में अब पड़ोसी देशों के और अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा।

कॉलेज में मौजूदा 100 सीटों की क्षमता में से 75 भारतीय वरिष्ठ रक्षा और सिविल सेवा अधिकारियों के लिए आरक्षित हैं और 25 विदेशी अधिकारियों के लिए हैं। 20 बढ़ी हुई सीटों में से लगभग आधी मित्र देशों के लिए आरक्षित होंगी। नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश से आने वाले अधिकारियों के लिए भी सीटें आरक्षित हैं। 10 सीटें 2021 में और 10 सीटें 2022 में बढ़ाई जाएंगी।

पांच मित्र देश ताजिकिस्तान, इंडोनेशिया, मालदीव, उज्बेकिस्तान और फिलीपींस अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित क्षेत्रों में अधिकारियों को वार्षिक प्रशिक्षण के लिए भारत भेज सकते हैं।
एनडीसी की शुरूआत 1960 में 21 प्रतिभागियों के साथ की गई थी। अगले दो वर्षों में एनडीसी अपनी मौजूदा 100 की क्षमता के साथ 20 और प्रतिभागियों को बढ़ाने जा रहा है। वैसे भी भारत मित्र देशों की ओर से आ रही भारी मांग को ध्यान में रखते हुए सीटें बढ़ा रहा है।

एनडीसी न केवल पड़ोस में बल्कि विश्व स्तर पर मित्र देशों के साथ मजबूत संबंधों को बढ़ावा देने और इन्हें मजबूत बनाने के लिए राष्ट्र के एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में भी कार्य करता है। अगले सत्र से प्रेसिडेंट चेयर ऑफ एक्सिलेंस को संस्था में स्थापित करने की योजना बनाई गई है। एनडीसी का उद्देश्य भविष्य के नीति निर्माताओं को राष्ट्रीय रणनीति की योजना में शामिल विभिन्न सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सैन्य, वैज्ञानिक और संगठनात्मक पहलुओं की व्यापक समझ के लिए आवश्यक पृष्ठभूमि से लैस करना है।

भारत-प्रशांत और भारतीय उप-महाद्वीप में बढ़े हुए सुरक्षा परिदृश्य के साथ-साथ भू-राजनीतिक वातावरण और विश्व व्यवस्था के पुनरुत्थान में हाल के बदलावों का भारत के विकास पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

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