कोरोन वैक्सीन पर एक अध्ययन का खुलासा

नई दिल्ली. एक तरफ दुनिया भर की सरकारें कोरोना वैक्सीन को लेकर गाल बजा रही हैं, दूसरी ओर एक अध्ययन में कहा गया है कि दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को 2022 तक कोविड-19 का टीका नहीं मिल पाएगा।

अध्ययन के अनुसार अधिक आय वाले देशों ने किस प्रकार कोविड-19 टीकों की भविष्य में आपूर्ति सुनिश्चित कर ली है, लेकिन शेष दुनिया में इनकी पहुंच अनिश्चित है। टीकों की आधी से अधिक खुराक (51 प्रतिशत) अधिक आय वाले देशों को मिलेंगी, जो दुनिया की आबादी का 14 प्रतिशत हैं। शेष बची खुराक कम एवं मध्यम आय वाले देशों को मिलेंगी। जबकि वे दुनिया की जनसंख्या का 85 प्रतिशत से अधिक हैं। अध्ययन में कहा गया है कि टीका वितरित करना, उसे विकसित करने जितना ही चुनौतीपूर्ण होगा।

एक अन्य अध्ययन में अनुमान जताया गया है कि दुनियाभर में 3.7 अरब वयस्क कोविड-19 का टीका लगवाना चाहते हैं, जो खासकर कम और मध्यम आय वाले देशों में मांग के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए निष्पक्ष और न्यायसंगत रणनीतियां बनाने की महत्ता को रेखांकित करता है। अध्ययन दर्शाते हैं कि वैश्विक कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम की संचालनात्मक चुनौतियां टीका विकसित करने से जुड़ी वैज्ञानिक चुनौतियों जितनी ही मुश्किल होंगी। दुनिया की करीब एक चौथाई आबादी को 2022 तक कोविड-19 का टीका संभवत: नहीं मिल पाएगा और यदि सभी टीका निर्माता अधिकतम निर्माण क्षमता तक पहुंचने में सफल हो जाए तो भी 2022 तक दुनिया के कम से कम पांचवें हिस्से तक टीका नहीं पहुंच पाएगा।

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