नई दिल्ली. भारतीय सीमा पर अपनी वेस्टर्न थिएटर कमान की तैनाती कर भारत को नीचा दिखाने की कोशिश कर चुके चीन ने सेना की तैनाती के कानून बदलकर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को बेहद ताकतवर बना दिया है। इससे चीनी राष्ट्रपति को भौगोलिक सीमाओं, समुद्री सीमाओं और वायुक्षेत्र के बाहर इलेक्ट्रोमैग्नेटिक नेटवर्कों और बाहरी अंतरिक्ष तक सेना की तैनाती के अधिकार मिल गए हैं।

रक्षा विशेषज्ञ इसे भारत के लिए नए खतरे की तरह देख रहे हैं क्योंकि इससे जिनपिंग को वन बेल्ट, वन रोड अभियान के तहत आने वाली संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सेना की तैनाती के अधिकार मिल गए हैं। इस रोड का सामरिक महत्व का एक बडा हिस्सा भारतीय इलाके से सटा हुआ है। ये रोड उस ट्राईएंगल के नजदीक से गुजरती है जिसकी सीमाएं पाकिस्तान, चीन, अफगानिस्तान से मिली हुई हैं और रूसी इलाके तक उसकी पहुंच है।

सामरिक विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू मोर्चे पर अलग तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे चीनी राष्ट्रपति ने अपने नेशनल डिफेंस लॉ में बदलाव करके उन पांच थिएटर कमानों पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली जिनकी तैनाती के अधिकार चीन के सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के पास हैं। राष्ट्रपति शी इस कमीशन के चेयरमैन हैं।

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार नए बदलाव युद्ध की तैयारी और क्षमता बढ़ाने पर केंद्रित हैं। इसके तहत जब भी संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा या विकास के हित ख़तरे में होंगे तो कमीशन राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सेना की तैनाती कर सकेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों के साथ ही सीएमसी के पास अधिक शक्तियां आ जाएंगी और पहले निर्णय के जो अधिकार स्टेट काउंसिल या कैबिनेट के पास थे, वे अब सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के पास आ गए हैं। समाचार एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि नेशनल डिफेंस लॉ में बदलाव का बड़ा मक़सद चीनी सेना के आधुनिकीकरण की रफ़्तार को तेज करना है।

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