नई दिल्ली. एशिया प्रशांत ​क्षेत्र में रूस और चीन के बॉम्बर विमानों की संयुक्त गश्त ने अमेरिकी सैनिक छाते तले सुरक्षित महसूस करने वाले जापान और दक्षिण कोरिया की नींद हराम कर दी है।

इस गश्त ने भारतीय सुरक्षा विशेषज्ञों को भी चिंतित कर दिया है क्योंकि रूस का चीन के साथ प्रशांत क्षेत्र में संयुक्त गश्त का ये दूसरा चरण है। इससे भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ना लाजिमी है। भारत इन दिनों चीनी सीमा पर पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के हमलावर तेवरों का सामना कर रहा है।

22 दिसम्बर को चीन और रूस की वायु सेनाओं ने पश्चिमी प्रशांत महासागर क्षेत्र में संयुक्त एयर पेट्रोलिंग मिशन को अंजाम देकर खतरनाक संकेत दिए हैं। रूसी वायुसेना के अनुसार उसके टीयू–95 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर जहाजों ने चीन के 4 एच-6के बाॉम्बर जहाजों के साथ पूर्वी चीन सागर और जापान सागर पर साथ-साथ उड़ान भरी और गश्त लगाई।

दोनों देशों ने पिछली बार ऐसी ही साझा गश्त जुलाई 2019 में लगाई थी। साझा गश्त में शामिल छह लड़ाकू विमान उन दोकदो द्वीपसमूहों के ऊपर से भी गुजरे, जिन्हें ताकेशिमा द्वीपों के नाम से भी जाना जाता है। इन द्वीपों को लेकर दक्षिण कोरिया और जापान के बीच सीमा विवाद हैं। इन द्वीपों पर दक्षिण कोरिया का कब्जा है जिसे जापान स्वीकार नहीं करता।

सूत्रों के अनुसार चीनी लड़ाकू विमान पूर्वी चीन सागर में सोकोट्रा के पास से दक्षिण कोरिया की सीमा में घुसे। इससे जापान और दक्षिण कोरिया के कान खड़े हो गए। ये बॉम्बर जापान के सबसे बड़े सैनिक अड्डे ओकिनावा के ऊपर से गुजरे। हालांकि जापानी लड़ाकू विमानों ने उनका पीछा किया लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकला। अलबत्ता दक्षिण कोरिया कुछ नहीं कर पाया।

अलबत्ता साझा गश्त का दूसरा चरण भारतीय विदेश नीति के समक्ष नई चुनौ​ती पेश कर गया। उसे रूस के साथ सैन्य सहयोग को बरकरार रखने के लिए एक साथ कई देशों को साधना पड़ेगा जिनमें अमेरिका और जापान प्रमुख हैं।

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