नई दिल्ली. पूरी दुनिया जिस चीनी अरबपति जैक मा के लापता होने पर अटकलें लगा रही है, वह चीन की एक जेल में है। उन्हें चीनी बैंकों को सूदखोर सेठ बताने का खामियाजा भुगतना पड़ा है।

हांगकांग के द एशिया टाइम्स अखबार ने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के हवाले से कहा है कि जैक मा को देश नहीं छोड़ने का आदेश दिया गया है। जैक मा नवंबर 2020 से सार्वजनिक इवेंट या टीवी शो में नजर नहीं आ रहे हैं।

ब्लूमबर्ग के मुताबिक अलीबाबा चीन के मशहूर कारोबारी और बोलने के लिए प्रसिद्ध जैक मा की कम्पनी है। जैक कभी एक स्कूल में पढ़ाया करते थे और अब अरबपति हैं। अलीबाबा विश्व की बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक है। अलीबाबा का टर्नओवर अरबों में है। कंपनी का भारत के पेटीएम में भी निवेश है।

पिछले साल नवंबर में जैक को चीनी अधिकारियों को बड़ा झटका देते हुए एंट ग्रुप के 37 अरब डॉलर के आईपीओ को निलंबित कर दिया था। स्वतंत्र मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस एक्शन के बाद जैक मा पर अलीबाबा ग्रुप के खिलाफ चल रही जांच पूरी होने तक चीन से बाहर जाने पर प्रतिबंध लगा ​दिया गया।

जैक मा अपने बनाए टीवी शो ‘अफ्रीका के बिजनेस हीरो’ में भी नजर नहीं आ रहे हैं। कार्यक्रम में उनकी जगह किसी और शख्स को भेज दिए जाने के बाद से ये अटकलें बढ़ गई कि जैक मा को नजरबंद कर दिया गया है।

चीन की सरकार अलीबाबा ग्रुप पर मोनोपोली यानी एकाधिकार के गलत इस्तेमाल को लेकर तहकीकात कर रही है। अलीबाबा ने कहा था कि एसएएमआर के जरिए एंट ग्रुप को नोटिस भी भेजा गया है। यह जैक-मा की ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा डॉट कॉम और फिनटेक एंपायर के लिए बहुत बड़ा झटका माना गया।

जैक मा ने चीन के वित्तीय नियामकों को इस बात के लिए लताड़ लगाई थी कि वो जोखिम लेना बिल्कुल पसंद नहीं करते। चीन के बैंकों पर सूदखोर सेठों जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया। चीनी बैंक बिना कोई चीज गिरवी रखवाए कर्ज नहीं देते। चीन में ज्यादातर बैंक सरकारी हैं, इसलिए उनकी टिप्पणियों को सीधे सरकार के खिलाफ कही गई बात माना गया।

उधर चीन के मार्केट रेगुलेटर का कहना है कि उसने अलीबाबा के खिलाफ बाजार पर एकाधिकार कायम करने संबंधी कोशिशों को लेकर कार्रवाई शुरू की है। चीन सरकार ने जैक मा को कमजोर करने के लिए हाल ही उनके बैंक एन्ट ग्रुप की शेयर बाजार में लिस्टिंग को रोक दिया।

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