नई दिल्ली. भारत के अं​तरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) को विदेशी उपग्रह प्रक्षेपण मामले में अगले कुछ सालों में चीन से कड़ी चुनौती मिल सकती है। चीन ने शुक्रवार को एक साथ 13 उपग्रह प्रक्षेपित कर इसके संकेत दिए हैं। रूस को छोड़कर एशिया में अभी तक इसरो ही एक साथ कई उपग्रह एक साथ प्रक्षेपित कर सकता था।

चीन ने शुक्रवार को 13 उपग्रहों को सफलतापूर्वक कक्षाओं में स्थापित करा दिया। इनमें 10 उपग्रह अर्जेंटीना के हैं। इसे विदेशी उपग्रहों का सबसे बड़ा प्रक्षेपण माना जा रहा है। इससे चीन को करोड़ों डॉलर मिल सकते हैं।

दस वाणिज्यिक दूर संवेदी उपग्रह भी प्रक्षेपित

एक रिपोर्ट के मुताबिक ‘लॉग मार्च-6’ रॉकेट ने उपग्रहों के साथ शांग्सी प्रांत के तायुन उपग्रह प्रक्षेपण केन्द्र से उड़ान भरी। उपग्रहों में अर्जेंटीना की कंपनी ‘सैटेलॉजिक’ द्वारा निर्मित 10 वाणिज्यिक दूर संवेदी उपग्रह भी शामिल थे। शुक्रवार को हुआ प्रक्षेपण लॉग मार्च रॉकेट श्रेणी का 351वां प्रक्षेपण था। चीन सैटेलॉजिक के लिए 90 पृथ्वी निगरानी उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है।
अर्जेंटीना के साथ हुए समझौते के आर्थिक पक्ष के बारे में जानकारी नहीं हैं लेकिन ग्रेट वॉल कंपनी के उपाध्यक्ष फू झिहेंग ने पिछले वर्ष कहा था कि यह समझौता करोड़ों अमेरिकी डॉलर का है।

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