नई दिल्ली. चीन से सीमा पर तनाव भारत की अर्थव्यवस्था के लिए फायदे का सौदा सिद्ध हुआ है। एलएसी पर चीनी घुसपैठ के बाद चीन से होने वाले आयात में भारी गिरावट आई है जिससे भारत का व्यापार घाटा लगभग 12 अरब डालर घट गया है। पिछले पन्द्रह साल में यह पहला मौका है जब भारत के व्यापार घाटे में गिरावट आई है।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार नवंबर अंत में चीन का भारत में आयात करीब 13 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार नवंबर में भारत के कुल आयात में 13.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। भारत के विद्युत और ग़ैर-विद्युत मशीनरी के आयात में 13.4% की गिरावट आई है और इसका भारत में सबसे ज़्यादा आयात चीन से हो रहा था।

2019 में इलेक्ट्रिकल मशीनरी और अन्य इलेक्ट्रिक उत्पाद सबसे अधिक चीन से आयात किए गए जिनकी क़ीमत क़रीब 20 अरब डॉलर थी। इलेक्ट्रिक सामानों के अलावा भारत, चीन से ऑर्गेनिक कैमिकल, लौह अयस्क, कपास और फ़र्टिलाइज़र मंगवाता है।

कोरोना महामारी के कारण भारत की अर्थव्यवस्था संकटग्रस्त है लेकिन स्टील का निर्यात अप्रैल और जुलाई के बीच दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है। भारत के स्टील निर्यात में अप्रत्याशित उछाल चीन के कारण है जबकि दोनों देशों में भारी तनातनी है। एक तरफ़ भारत चीन के निवेश को लेकर सतर्कता बरत रहा है तो दूसरी तरफ़ चीन इन सबकी उपेक्षा कर भारत से जमकर स्टील ख़रीद रहा है। भारत की अग्रणी स्टील कंपनी टाटा स्टील लीमिटेड और जेएसडब्ल्यू स्टील लीमिटेड उन कंपनियों में शामिल हैं जिन्होंने अप्रैल से जुलाई के बीच कुल 40.64 लाख टन निर्मित और अर्धनिर्मित स्टील उत्पाद विश्व बाज़ार में बेचे। इसकी तुलना में इसी वक़्त पिछले साल महज़ 10.93 लाख टन ही स्टील बेचे गए थे। 40.64 लाख टन स्टील में चीन और वियतनाम ने केवल 10.37 लाख स्टील ख़रीदे हैं।

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