नई दिल्ली. भारतीय पूरी दुनिया में बसे हुए हैं लेकिन उनकी सबसे अधिक संख्या दो मुस्लिम देश संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब में है। इसके अलावा अमेरिका वह तीसरा देश है जहां भारतीयों की न सिर्फ सबसे अधिक संख्या है बल्कि वे ​अमेरिकी विज्ञान अनुसंधान संस्थाओं की रीढ़ की हड्डी हैं।

संयुक्त राष्ट्र संघ ने ये आकलन किया है। संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि प्रवासी भारतीयों की संख्या विश्व में सबसे अधिक हैं। उसने कहा है कि भारतीय सबसे अधिक विविधता और जीवतंता वाले समुदायों में से एक है। वर्ष 2020 में करीब 1.8 करोड़ भारतीय वतन से दूर दुनिया के अलग-अलग देशों में रह रहे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के जनसंख्या प्रभाग के अनुसार दुनिया में भारत की सबसे अधिक प्रवासी आबादी है। भारतीय प्रवासी आबादी पूरी दुनिया में बसी हुई है।दुनिया के अन्य देशों के प्रवासियों की आबादी एक देश या क्षेत्र तक सीमित है लेकिन भारतीय प्रवासी सभी महाद्वीपों अर्थात खाड़ी से लेकर अमेरिका तक और ऑस्ट्रेलिया से लेकर ब्रिटेन तक में फैले हुए हैं। ये दुनिया की सबसे विविधता युक्त एवं गतिशील आबादी है।

संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवास-2020 रिपोर्ट के मुताबिक विदेशों में रहने वाले भारतीयों में सबसे अधिक 35 लाख संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं जबकि 27 लाख भारतीय अमेरिका में और 25 लाख सऊदी अरब में रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, कुवैत, ओमान, पाकिस्तान, कतर और ब्रिटेन में भी भारतीय प्रवासियों की बड़ी संख्या है।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2000 से 2020 के बीच प्रवासियों की संख्या में वृद्धि हुई और इसका सबसे अधिक लाभ भारत को हुआ जिसकी विदेश में रहने वाली आबादी की संख्या में एक करोड़ की वृद्धि हुई। इसके बाद सीरिया, वेनेजुएला, चीन और फिलीपीन का स्थान है। भारत से प्रवास की मुख्य वजह रोजगार और पारिवारिक कारण रहे और जबरन प्रवास का प्रतिशत (करीब 10 प्रतिशत) है। प्रवासियों का सबसे पसंदीदा देश अमेरिका है। 1.6 करोड़ प्रवासियों के साथ जर्मनी दूसरे स्थान पर रहा जबकि सऊदी अरब, रूस और ब्रिटेन क्रमश: 1.3 करोड़, 1.2 करोड़, 90 लाख अंतरराष्ट्रीय प्रवासियों के साथ तीसरे, चौथे, पांचवें स्थान पर हैं।

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