नई दिल्ली. झगडालू पडोसियों से हर कोई बचना चाहता है क्योंकि वह शांति को पलीता लगा देता है। भारत का भी एक ऐसा ही पड़ोसी है जिसका दुनिया के लगभग हर देश के साथ झगड़ा है। उस पड़ोसी का नाम है चीन जिसका महाशक्तियों के साथ ही छोटे-छोटे देशों के साथ भी विवाद हमेशा चर्चा का विषय बना रहता है।

चीन और अमेरिका के बीच ऐसा ही झगड़ा कई दशक से जारी है। हाल ही इसने तब नया मोड़ ले लिया जब अमेरिका ने बार बार कोरोना फैलने के लिए चीन को जिम्मेदार ठहराया। बदले में चीन ने अमेरिका पर हांगकांग मामले में टांग अडाने का आरोप लगाया।

चीन का हांगकांग के साथ भी लम्बा विवाद है। चीन ने वहां राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लागू करना चाहा लेकिन अमेरिका और दूसरे पश्चिमी देशों के विरोध के चलते ऐसा नहीं कर पाया। हांगकांग कभी ब्रिटेन की कालोनी था। ब्रिटेन ने हांगकांग के ब्रिटिश नेशनल ओवरसीज पासपोर्ट धारकों को विस्तृत वीजा अधिकार देने का ऐलान करके विवाद को और हवा दे दी है।

चीन लोकतांत्रिक-शासन वाले देश ताइवान पर आधिपत्य का दावा भी करता है। चीन ने ताइवान पर इसीलिए कूटनीतिक और सैन्य दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। ताइवान की राष्ट्रपति ने चीन के दावों को ठुकराते हुए कह दिया है कि सिर्फ ताइवान के लोग उसके भविष्य का फैसला कर सकते हैं।

भारत और चीन के बीच विवादित सीमा पर अभी तक का सबसे गंभीर गतिरोध जारी है। लद्दाख में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हाथापाई हो चुकी है। चीन और कनाडा के रिश्ते तब से खराब हैं जब कनाडा ने हुआवेई के संस्थापक की बेटी मेंग वानझाऊ को हिरासत में ले लिया था। जवाब में चीन ने कनाडा के दो नागरिकों को गिरफ्तार कर लिया और केनोला बीज आयात को ब्लॉक कर दिया। ऑस्ट्रेलिया से जौ आयात पर शुल्क लगाने से चीन और आस्ट्रेलिया के बीच विवाद और बढ़ गया है। दोनों देशों के रिश्तों में खटास तब बढ़ गई जब ऑस्ट्रेलिया ने 5जी ब्रॉडबैंड नेटवर्क से हुआवेई को बैन कर दिया था। ऊर्जा स्त्रोतों से समृद्ध इलाके दक्षिण चीन सागर को लेकर फिलीपींस, ब्रूनेई, विएतनाम, मलेशिया और ताइवान उसका झगड़ा भी सामरिक विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय रहा है। ये इलाका महत्वपूर्ण व्यापार मार्ग है जिस पर चीन अपना आधिपत्य चाहता है।

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