नई दिल्ली. भारत ने दावा किया है कि वह दुनिया के जिन गरीब देशों को विभिन्न प्रकार की सहायता उपलब्ध कराता है, उनके गले में कर्ज का फंदा नहीं डालता। ना ही सहायता प्राप्त करने वाले देशों के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करने की कोशिश करता है।

श्रीलंका और मालदीप भुगत रहे हैं फल

भारत ने जी-77 की मंत्रिस्तरीय वार्षिक बैठक में चीन पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि उसकी सहायता से दूसरे देशों को समस्या नहीं पैदा होती, बल्कि वे अपनी समस्याओं से पार पाने का हौसला पाते हैं। ज्ञात रहे कि चीन दूसरे देशों को ऋण देकर उन्हें कर्ज के जाल में फंसा लेता है और कर्ज की वसूली के लिए उन देशों के संसाधनों पर कब्जा कर लेता है। उसने हाल ही मालदीप और श्रीलंका में ऐसा ही किया है। चीन की सहायता से बनाए गए बंदरगाहों पर अब चीन का ही कब्जा है क्योंकि ये देश उसके कर्ज को चुका नहीं पाए।

इसके साथ भारत ने कोविड-19 महामारी के चलते हुए नुकसान से उबरने के लिए विकासशील देशों के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि टी एस तिरुमूर्ति ने जी-77 के विदेश मंत्रियों की 44वीं बैठक में गुरुवार को कहा कि भारत की विकास सहायता हमारे सहयोगियों की विकास प्राथमिकताओं से निर्देशित होती है। हमारी सहायता ऋणग्रस्तता पैदा नहीं करती है और ये बिना शर्त के है।

अधिक वैक्सीन बनाता है तो सबको उपलब्ध भी कराता है भारत

तिरुमूर्ति ने कहा कि महामारी ने विकासशील देशों द्वारा हासिल की गई दशकों की प्रगति को जोखिम में डाल दिया है और बड़ी संख्या में लोग गरीबी में चले गए हैं। जी-77 देशों के रूप में हम ऐसा नहीं होने दे सकते। हमें विकास के पथ पर वापसी सुनिश्चित करने के लिए भरपाई, लचीलापन और सुधार के पक्ष में अपनी सामूहिक आवाज उठाने की जरूरत है।

तिरुमूर्ति ने जोर दिया कि वसुधैव कुटुंबकम् की भावना के अनुरूप भारत का दृष्टिकोण मानव केंद्रित होगा और वह आपसी सम्मान तथा राष्ट्रीय स्वामित्व के सिद्धांतों के आधार पर सभी के सतत विकास के लिए प्रतिबद्ध है। महामारी से लड़ने के लिए वाजिब कीमत पर स्वास्थ्य प्रणालियों और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत पर भी जोर दिया गया। भारत 150 से अधिक देशों को तत्काल स्वास्थ्य और चिकित्सा आपूर्ति में सहायता कर रहा है। तिरुमूर्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया है कि भारत सबसे बड़े वैक्सीन उत्पादक देश के रूप में अपनी उत्पादन और वितरण क्षमता पूरी मानवता को उपलब्ध कराएगा।

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