अमेरिकी चुनाव में भूख ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

नई दिल्ली. भूख नहीं होती तो शायद डोनाल्ड ट्रंप अगले चार तक फिर लगातार झूठ आधारित शासन कर रहे होते। ये निष्कर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हिस्सा लेने वाले वोटरों के बीच किए गए एक सर्वे में सामने आया है। कहा जा रहा है कि भूख का सामना कर रहे हर पांचवें अमेरिकी ने राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडेन को वोट दिया।

चुनावों के दौरान एक वालंटियर उम्मीदवारों का प्रचार कर रहे समर्थकों से पूछता था, अगर आप जीत गए तो संयुक्त राज्य और दुनियाभर से भूख को दूर करने, गरीबी मिटाने और अवसर पैदा करने के लिए क्या करेंगे? मतदान केंद्रों के आसपास मुफ्त खाना बांटते लोगों को भी टेलीविजन कैमरों ने रिकार्ड किया। सीधे तौर पर ये कहा जा सकता है कि भूख इस चुनाव में मुख्य मुद्दे के रूप में उभरा। कई आलोचक तथा संयुक्त राज्य में भूख और खाद्य असुरक्षा पर नजर रखने वाले कहते हैं कि पिछले कुछ समय पर नजर डालें तो इस समय देश खाद्य असुरक्षा से जूझ रहा है। कोविड-19 महामारी ने भूख की चुनौती को विकराल बना दिया है। अमेरिका में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार आमतौर पर भूख के बारे में बात नहीं करते।

खबरों में कहा गया है कि नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी में अनुसंधानकर्ताओं के अनुमान के अनुसार, अमेरिका के 23 प्रतिशत परिवार खाद्य असुरक्षा से जूझ रहे हैं। अर्थात हर पांचवा अमेरिकी भूख का सामना कर रहा है। एक अमेरिकी संस्था का कहना है कि जुलाई में लगभग 140 लाख बच्चों को पर्याप्त भोजन नहीं मिला।

महामारी के कारण संयुक्त राज्य में लाखों लोगों ने नौकरियां गंवा दी। अमेरिकी सरकार ने कोरोना खाद्य सहायता कार्यक्रम के तहत किसानों को 18 बिलियन अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष भुगतान किया है।

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