नई दिल्ली. भारतीय सेना के मेघदूत कर्नल नरेन्द्र नहीं होते तो सियाचिन पर पाकिस्तान का कब्जा होता और आज पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना के सामने डटी भारतीय सेना को असंख्य जान कुर्बान करनी पड़तीं। सेना के हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल के कमांडेंट रहे कर्नल नरेन्द्र ने सियाचिन के सामरिक महत्व को सबसे पहले पहचाना और उसे एक ऐसे मोर्चे के रूप में देखा जिससे पाकिस्तानी सेना पर हावी होने के साथ ही चीन से सटी लद्दाख सीमाओं को सुरक्षित बनाया जा सकेगा।

यहां बता दें कि अगर सियाचिन पर पाकिस्तानी सेना का कब्जा हो जाता तो चीनी सेनाएं उसके रास्ते लद्दाख पर दबाव बढ़ा देंती जो भारतीय सेना को उसी स्थिति में पहुंचा देता जिसमें पूर्वी सीमा पर भारत का ‘चिकन नेक’ अभी फंसा हुआ है। इस चिकन नेक के जरिए ही भारत सिक्किम समेत पूर्वी सीमा पर चीनी चुनौतियों का जवाब दे पाता है। असल में सियाचिन उस कराकोरम राजमार्ग की काट है जिसके जरिए चीन पाक अधिकृत कश्मीर तक कभी भी पहुंच सकता है। सियाचिन पर काबिज भारतीय सेना मात्र चार घंटे के नोटिस पर कराकोरम से आवाजाही को बाधित कर सकती है।

सेना के अनुसार सियाचिन ग्लेशियर और साल्टोरो रेंज में अगर कर्नल नरेन्द्र अभियान नहीं चलाते तो शायद इस वक्त सियाचिन पर पाकिस्तान का कब्जा होता। सियाचिन पर कब्जे के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन मेघदूत’ चलाया था। कर्नल पद्म श्री के साथ-साथ अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित हो चुके थे।
उन्हीं कर्नल नरेंद्र ‘बुल’ कुमार का गुरुवार को निधन हो गया। कर्नल का जन्म 1933 में रावलपिंडी में हुआ था। 1953 में भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून से कुमाऊं रेजिमेंट में शामिल हुए कर्नल को हाई एल्टीट्यूड वारफेयर स्कूल के कमांडेंट बनाने के साथ ही उन्होंने सियाचिन ग्लेशियर और साल्टोरो रेंज पर पर्वतारोहण अभियान चलाए और भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेनाओं को धूल चटाकर सियाचिन पर कब्जा कर लिया।

कर्नल नरेंद्र ने सबसे ऊंची चोटियों में शुमार नंदादेवी चोटी पर पर भी तिरंगा फहराया था। उनके निधन पर पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘अपूरणीय क्षति! कर्नल नरेंद्र ‘बुल’ कुमार (सेवानिवृत्त) ने असाधारण साहस और परिश्रम के साथ राष्ट्र की सेवा की। उनके परिवार और शुभचिंतकों के प्रति संवेदना।’ वहीं सीडीएस जनरल बिपिन रावत ने कहा कि सालतोरो रेंज और लद्दाख के दूसरे इलाकों पर हमारा वर्चस्व कर्नल नरेंद्र के साहस से ही सम्भव हो पाया।

Leave a comment

Your email address will not be published.