नई दिल्ली. ​वह पिछले बीस साल से चंदे पर जिंदा है लेकिन इसके बावजूद पूरी दुनिया उसकी ​इज्जत करती है क्योंकि उसने उन जानकारियों को स्थानीय भाषा में अपने पोर्टल पर जगह दी है जिसके लिए एक जमाने में बड़ी-बड़ी किताबों को खंगालना पड़ता था। जी हां, हम यहां बात कर रहे विकिपीडिया की। वही विकिपीडिया जिसे आप तब खोलते हैं जब किसी ऐसी जानकारी की तलाश होती है जिसे किताबों में ढूंढना दुष्कर होता है।

इस साल विकिपीडिया 20वां जन्मदिन मना रहा है। इंटरनेट के इस एनसाइक्लोपीडिया ने बीते 20 सालों में वॉलंटियरों की सूचनाओं के दम पर एक लंबा सफर तय किया है। 15 जनवरी 2001 को अमेरिकी ब्रिटिश उद्यमी जिमी वेल्स ने इसकी नींव रखी थी। आज यह दुनिया की सबसे मशहूर वेबसाइटों में सातवें नंबर पर है। वेबसाइट पर मौजूद 5.5 करोड़ आलेखों को हर महीने लोग 15 अरब बार खोल कर पढ़ते हैं।

विकीपीडिया वेबसाइट अंग्रेजी में शुरू की गई। हालांकि दो महीने के भीतर ही इसे जर्मन और स्वीडिश भाषा में भी लॉन्च कर दिया गया। अब यह दुनिया की 309 भाषाओं में दिखता है। विकीपीडिया में जुलाई 2003 में हिंदी भाषा में जानकारियां लोड करना शुरू किया गया। फिलहाल 23 भारतीय भाषाओं में विकीपीडिया की वेबसाइट मौजूद हैं। दक्षिण पश्चिमी भारत की तुलु भाषा वीकीपीडिया के लिए सबसे नई भारतीय भाषा है।

2006 में जिमी वेल्स ने विकीपीडिया पर हर उस भाषा के लिए एक लाख से ज्यादा एंट्री रखने का लक्ष्य तय किया था जिसे एक करोड़ से ज्यादा लोग बोलते हैं। हालांकि उन्होंने माना है कि इस लक्ष्य तक पहुंचने में अभी 20 साल और लगेंगे। विकीपीडिया इंटरनेट के शुरुआती दिनों की मुहिम को आज भी प्रासंगिक बना रहा है जब इंटरनेट को खुले संसाधन के रूप में देखा गया था। विकीपीडिया अनुवाद से ज्यादा स्वतंत्र लेखन को महत्व देता है।

हर भाषा में बनाए गए पन्नों पर वॉलंटियरों ने खुद इसमें जानकारियां जोड़ी हैं। पारंपरिक एनसाइक्लोपीडिया से उलट यहां ऐसे लेखकों का स्वागत होता है जो लेखन में विशेषज्ञता नहीं रखते हैं। कई बार विकीपीडिया पर गलत जानकारी होने की शिकायत आती है। विकीपीडिया हर किसी को ऐसी जानकारी संपादित करने या फिर इसकी सूचना देने की आजादी देता है। साथ ही वेबसाइट किसी भी सूचना के आखिरी होने का दावा नहीं करता यानी इसे कभी भी बदला जा सकता है।

विकीपीडिया का खर्च चंदे से चलता है। चंदा जुटाने के लिए हर साल वीकीपीडिया ऑनलाइन अभियान चलाता है। 2020 में भी उसने करीब 7 करोड़ डॉलर चंदे के रूप में जुटाए। लोग 5 डॉलर जैसी मामूली रकम से लेकर बड़ी राशि भी दान में देते हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published.