नई दिल्ली. गोरों की गुलाम रही अफ्रीकी जनता के मन में उनके प्रति अब भी खासी कड़वाहट है। श्वेत—अश्वेत मुद्दे को केन्द्र में रखकर चलाए गए डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव अभियान ने इस कड़वाहट को और बढ़ा दिया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जो बाइडेन में से किसी एक की जीत की घोषणा में देरी पर तंज कसते हुए जिम्बाब्वे में सत्तारूढ़ जेडएएनयू-पीएफ पार्टी प्रवक्ता पैट्रिक चिनामासा ने कहा कि ‘दासों के पूर्व मालिकों’ से लोकतंत्र के बारे में सीखने के लिए कुछ भी नहीं है। नतीजों में देरी के चलते दुनिया के कई हिस्सों से अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया और शासन प्रणाली की आलोचना के ये सुर अकेले नहीं हैं।

अलेक्सी ने चुटकी ली, ये है चुनाव

विभिन्न मीडिया मंचों पर चल रहीं खबरों के अनुसार रूस के विपक्षी नेता अलेक्सी नवलनी (जिन्हें क्रेमिलन को चुनौती देने और रूस को अधिक लोकतांत्रिक बनाने की मांग करने की वजह से कथित तौर पर जहर दिया गया था) ने कहा कि नतीजों में देरी का मतलब है कि लोकतंत्र काम कर रहा है। उन्होंने ट्वीट किया, सुबह उठा और विजेता देखने के लिए ट्विटर पर गया। अब भी स्थिति अस्पष्ट है। ये है चुनाव। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मौरिसन ने भी नतीजों में देरी को लोकतंत्र का प्रदर्शन करार दिया।

क्या ट्रंप नहीं तो देश को जला देंगे

दुनिया के कई हिस्सों में चिंता है कि अमेरिका विभाजनकारी चुनाव प्रचार के बाद कैसे उबरेगा! ट्रंप ने अपरिपक्व तरीके से अपनी जीत का दावा किया है। चुनाव को उच्चतम न्यायालय में घसीटने की धमकी दी है जिससे परेशानी बढ़ गई है और उनकी तुलना तानाशाहों से की जा रही है। सीरिया के विश्लेषक डैनी मक्की के अनुसार यह कुछ ऐसा है कि अगर ट्रंप नहीं तो हम देश को जला देंगे।

जर्मनी का मत: बहुत विस्फोटक स्थिति

जर्मनी के उप चांसलर ऑलफ स्कोल्ज ने मतगणना पूरा होने पर जोर दिया। वहां की रक्षामंत्री एन्नीग्रेट क्राम्प-कारेनबावर ने कहा कि नतीजों की वैधता की लड़ाई शुरू हो जाना बहुत विस्फोटक स्थिति है।
यूरोप ने मतगणना के दौरान संयम की अपील की है। जापान के वित्तमंत्री तारो असो ने कहा कि उन्हें बताया जा रहा है कि नतीजे स्पष्ट होने में कुछ समय लगेगा। पता नहीं कि यह कैसे हमें प्रभावित करेगा।

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