नई दिल्ली. ये हिन्दुस्तानी कहावत ‘अब पछताए क्या होत, जब चिडिया चुग गई खेत’ अमेरिकी निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर सटीक बैठती है। व्यापारी से राजनेता बने डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे कार्यकाल के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव हारने के बाद चीन की 31 कंपनियों में अमेरिकी निवेश को प्रतिबंधित करने वाले एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार चीनी सेना के स्वामित्व और नियंत्रण वाली इन कम्पनियों को
प्रतिबंधित करने से अमेरिकी पूंजी के तेजी से दोहन पर रोक का अनुमान है।

अमेरिकी सेना को सीधी चुनौती की तैयारी

आदेश के मुताबिक कम्युनिस्ट चीनी सेना की कंपनियों में किसी भी रूप में निवेश करने वाली प्रतिभूतियों की खरीद पर प्रतिबंध लगाया गया है। चीन संसाधन हासिल करने के लिए अमेरिकी पूंजी का तेजी से दोहन कर रहा है और सेना, खुफिया सेवा और अन्य सुरक्षा जरूरतों का विकास और आधुनिकीकरण करके अमेरिकी सेना को सीधे चुनौती देने की तैयारी में है। ट्रंप का कहना है कि इन 31 चीनी कंपनियों से चीन की सेना के विकास और आधुनिकीकरण में मदद मिल रही है।

वीडियो निगरानी उपकरण बनाती है चीनी कम्पनी

एक अमेरिकी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार प्रतिबंधित कंपनियों में स्मार्टफोन निर्माता हुआवेई और वीडियो निगरानी उपकरण बनाने वाली कंपनी हिकविजन शामिल हैं। सूची में चाइना टेलीकॉम और चाइना मोबाइल भी हैं। वे न्यूयॉर्क शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। ट्रंप ने कहा कि ये कंपनियां अमेरिकी निवेशकों को प्रतिभूतियां बेचकर पूंजी जुटाती हैं और चीन ने अपने सैन्य विकास और आधुनिकीकरण के लिए अमेरिकी निवेशकों का शोषण किया।

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