नई दिल्ली. भारत में दुनिया के सबसे सख्त लॉकडाउन ने उसके परम्परागत दुश्मन पाकिस्तान के वारे-न्यारे कर दिए। इस दौर में उसका दम तोड़ चुका कपड़ा उद्योग न सिर्फ फिर से खड़ा हो गया बल्कि उसने भारत को मिलने वाले अधिकांश विदेशी आर्डरों पर भी कब्जा जमा लिया।
पाकिस्तान में कपड़ा उद्योग का केंद्र फ़ैसलाबाद हैं। वहां से यूरोपीय और अमेरिकी बाज़ारों में कपड़ा उत्पादों का निर्यात किया जाता है। फैसलाबाद को विदेशों से पहले की तुलना में अधिक ऑर्डर मिल रहे हैं। भारत में लॉकडाउन के चलते निर्यात की सप्लाई चेन टूट गई थी। इसलिए विदेशी ख़रीदारों ने पाकिस्तान का रुख़ कर लिया। अधिक ऑर्डर मिलने से पिछले चार महीनों में पाकिस्तान का कपड़ा निर्यात 4.5 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

अक्तूबर में पाकिस्तान के कपड़ा निर्यात में 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। जबकि भारत में इस महीने कपड़ा उत्पादों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। कपड़ा उद्योग पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत से अधिक है। कुल निर्यात में लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा कपड़ा उत्पादों का है। ये पाकिस्तान का सबसे बड़ा मैनूफ़ैक्चरिंग क्षेत्र है, जो औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 40 प्रतिशत श्रम शक्ति को रोज़गार उपलब्ध कराता है। बोर्ड ऑफ़ इनवेस्टमेंट के आंकड़ों के मुताबिक़, पाकिस्तान एशिया का आठवां सबसे बड़ा कपड़ा निर्यातक है। वर्तमान में, पाकिस्तान में चार सौ से अधिक कपड़ा फैक्ट्रियां हैं।

फ़ैसलाबाद और कराची पाकिस्तान में कपड़ा क्षेत्र के दो प्रमुख केंद्र हैं। एक कपड़ा मिल मालिक के अनुसार ऑर्डर्स के साथ-साथ सरकार से मिलने वाली सब्सिडी भी इसके उत्पादन को बढ़ाने में मदद कर रही हैं। भारत में कड़े लॉकडाउन के कारण आर्डर पूरा न होने की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय ख़रीदारों को पाकिस्तान की ओर आकर्षित किया। यूरोपीय और अमेरिकी बाज़ारों में इन्वेंट्री गैप को पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग ने भरा है।

यूरोप और अमेरिका में कोरोना वायरस के कारण लगने वाले लॉकडाउन ने विदेशों से उत्पादों के आयात को बुरी तरह प्रभावित किया था। लॉकडाउन के दौरान पहले से जमा स्टॉक ख़त्म हो गया। लॉकडाउन में छूट के बाद, उन्हें तत्काल सामान की आवश्यकता थी, इसलिए आयातकों ने पाकिस्तान का रुख़ किया। भारत में लॉकडाउन के कारण, वहां का कपड़ा उद्योग अमेरिका और यूरोप से आने वाले बड़े ऑर्डर्स को पूरा करने में असमर्थ था, जिससे पाकिस्तान को फ़ायदा हुआ। अमेरिका और यूरोप में कोरोना वायरस से जुड़े लॉकडाउन में थोड़ी नरमी आई तो इसने मांग को एक दम से बढ़ाया लेकिन निकट भविष्य में कोरोना वैक्सीन आ जाने पर बाज़ार की स्थिति सामान्य हो जाएगी।

कपड़ा उद्योग के अच्छे प्रदर्शन की वजह सरकार की नीतियां भी हैं, जो कपड़ा उद्योग को हर तरह से सहायता उपलब्ध करा रही हैं। इन दिनों न केवल कपड़ा क्षेत्र अपनी पूरी क्षमता से चल रहा है, बल्कि पॉवरलूम भी अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं। कपड़ा उद्योग से जुड़े उद्योगपतियों के अनुसार उनके पास न केवल दिसंबर महीने के लिए निर्यात ऑर्डर हैं, बल्कि कुछ ने जून महीने तक के निर्यात ऑर्डर प्राप्त कर लिए हैं। इस साल कपास की फ़सल ख़राब होने के कारण उद्योग को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि इस क्षेत्र का सबसे बड़ा कच्चा माल कपास है। कपास की साढ़े छह से सात लाख गांठें उपलब्ध होंगी। जबकि पिछले साल साढ़े बारह लाख गांठ थीं। इस समस्या को दूर किया जा सकता है और इसका आसान उपाय यह है कि पाकिस्तान भारत से दवाई की तरह कपास आयात कर सकता है और यह पाकिस्तान को बहुत सस्ती पड़ेगी।

पाकिस्तान के कपड़ा उद्योग का मानना है कि जब मानव जीवन को बचाने के लिए भारत से दवाओं का आयात किया जा सकता है तो कपड़ा क्षेत्र की मदद के लिए वहां से कपास का आयात क्यों नहीं किया जा सकता है। पाकिस्तान सरकार कपास आयात पर नियामक शुल्क को कम करने के लिए काम कर रही है। वैसे पाकिस्तान में कपास का उत्पादन कम होने की वजह कपास की खेती वाले क्षेत्रों के आसपास चीनी मिल लगाया जाना है। जिसके कारण किसान कपास को छोड़ कर गन्ने की खेती कर रहे हैं।

साल 2016 में देश में कपड़ा उद्योग बंद हो गया था और कपड़ा मिलें यहां से बांग्लादेश स्थानांतरित हो रही थीं। फ़ैसलाबाद में कपड़ा क्षेत्र में कुशल श्रमिकों की कमी है। सरकार न केवल कपड़ा उद्योग में विविधता ला रही है. बल्कि यह पारंपरिक क्षेत्र जैसे कि सीमेंट और दवा निर्यात के अलावा अन्य उत्पादों के कुल निर्यात को बढ़ाने के लिए भी काम कर रही है।

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