नई दिल्ली. चुनावों में हार चुके निवर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी दांव चल दिया है। उनके समर्थक अमेरिकी सीनेट के एक समूह ने मतदान में कथित गड़बड़ी की जांच के लिए एक आयोग का गठन नहीं होने तक जो बाइडन की जीत को प्रमाणित करने से इनकार किया है।

टेक्सास से सीनेटर टेड क्रूज़ के नेतृत्व में 11 सीनेटरों की इस मांग को छह जनवरी को ठुकरा दिए जाने की सम्भावना है क्योंकि अधिकतर सीनेटर्स के जो बाइडन को समर्थन दे दिए जाने की उम्मीद है। राष्ट्रपति ट्रंप जो बाइडन की जीत को स्वीकार करने से इनकार करने के साथ बार-बार चुनाव में धोखाधड़ी का आरोप लगा रहे हैं। यद्यपि वे कोई प्रमाण पेश नहीं कर पाए और शायद इसी के चलते अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इस सिलसिले में पेश की गई अपील को ख़ारिज कर दिया।

देश के सभी 50 राज्यों के इलेक्टोरल कॉलेज जो बाइडन को 306 मत मिलने की पुष्टि कर चुके हैं। चुनाव में जीत के लिए इलेक्टोरल कॉलेज के 270 मतों की ज़रूरत होती है। मतदान के नतीजे 6 जनवरी को कांग्रेस के संयुक्त सत्र में फिर से गिने जाएंगे।

ये अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया का एक हिस्सा है। प्रक्रिया के तहत उप-राष्ट्रपति माइक पेंस सीनेट के अध्यक्ष होने के नाते जो बाइडन को विजेता घोषित करेंगे। इसके बाद जो बाइडन और उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस 20 जनवरी को शपथ ग्रहण करेंगे।

11 सीनेटर वर्ष 1877 में बनाए गए सीनेटर्स आयोग को फिर से बनाने की मांग कर रहे हैं। 1877 में चुनाव नतीजों की जांच के लिए दोनों पार्टियों की सहमति से एक द्विदलीय समिति का गठन किया गया था। उसी नजीर के आधार पर सीनेटर्स ने विवादित राज्यों में चुनाव के नतीजों की 10 दिनों की आपात जांच के लिए एक आयोग के गठन की मांग की है।

छह जनवरी को ये होना है

हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के सदस्यों की आपत्तियों पर दो घंटे चर्चा के बाद बाद मतदान होगा। इलेक्टोरल वोट खारिज करने के लिए दोनों सदनो में बहुमत से आपत्तियां स्वीकार होनी ज़रूरी है। जानकारों का कहना है कि ऐसा होना संभव नहीं है, क्योंकि डेमोक्रेट्स का हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में बहुमत है।

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