रेडक्रॉस ने एक शोध की ओर दिलाया ध्यान

नई दिल्ली. फेक न्यूज का राक्षस अब कोरोना वैक्सीन को निगलने को तैयार है। वैक्सीन सम्बंधी फेक न्यूज के चलते दुनिया के कई देशों के निवासी उस पर भरोसा खो बैठे हैं। ये खुलासा मानवाधिकार संस्था रेड क्रॉस अध्यक्ष फ्रांसेस्को रोका ने वर्चुअल बैठक में किया।

बैठक में फ्रांसेस्को रोका ने जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के एक शोध की ओर ध्यान दिलाया। शोध में कहा गया है कि जुलाई से अक्टूबर के बीच 67 देशों के लोगों में वैक्सीन को ले कर शंका बढ़ गई। शोध में हिस्सा लेने वाले एक चौथाई देशों में वैक्सीन स्वीकृति दर 50 फीसदी से भी कम पाई गई। पहले जापान 70 फीसदी लोग वैक्सीन का इंतजार कर रहे थे, अब केवल 50 प्रतिशत ही इसके लिए तैयार हैं। फेक न्यूज के चलते फ्रांस में सिर्फ 38 प्रतिशत लोग ही ​वैक्सीन पर ​विश्वास करने को तैयार हैं।

वैक्सीन पर शक केवल पश्चिमी देशों तक ही सीमित नहीं है। आठ अफ्रीकी देश कांगो, कैमरून, गाबोन, जिम्बाब्वे, सिएरा लियोन, रवांडा, लेसोथो और केन्या में भी उसके प्रति विश्वास में कमी आई है। अफ्रीका में यह मानने वालों की संख्या बढ़ रही है कि कोरोना वायरस अफ्रीकी युवाओं को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। बहुत से लोग ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि कोरोना वायरस हुआ करता था, लेकिन अब नहीं है। ये अलग-अलग देशों में ईजाद की गई फेक न्यूज का नतीजा है।

हालांकि दुनिया में पाकिस्तान जैसे देशों के निवासी भी हैं जिनके दस फीसदी को ये ही पता नहीं है कि कोरोना वायरस क्या है और दुनिया उससे कैसे जूझ रही है। पाकिस्तान उन देशों की सूची में शामिल है जहां आज भी पोलियो का पूरी तरह सफाया नहीं किया जा सका है। अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी दुनिया के 192 देशों में सक्रिय है।

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