नई दिल्ली. सेना तैनाती के अधिकारों को स्वयं की मुट्ठी में कैद करने के साथ ही चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उस वेस्टर्न थिएटर कमांड के कमांडर इन चीफ को हटा दिया है जिसके नेतृत्व में चीनी सेना ने पहले डोकलाम और अब लद्दाख में घुसपैठ की है।

शी जिनपिंग ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के पश्चिमी थिएटर कमान के प्रमुख जनरल ज्हाओ जोंगकुई को पश्चिमी कमान से हटाकर उनकी जगह जनरल ज्हेंग जूड़ोंग को तैनात किया है। जिनपिंग ने इसके अलावा वेस्टर्न थियेटर कमांड में पीएलए और सेंट्रल मिलिट्री कमीशन से जुड़े चार अन्य अधिकारी को प्रोन्नति दी है।

रक्षा मामलों के जानकार शी जिनपिंग के इस फ़ैसले को लद्दाख में चीनी सेना की नाकामी से जोड़कर देख रहे हैं।रक्षा विश्लेषकों मानना है कि शी जिनपिंग की ये कार्रवाई अप्रत्याशित है क्योंकि चीन की सेना में इस तरह के निर्णय कोई आम बात नहीं है। जबकि चीन की भारत से लगी 4500 किलोमीटर लंबी सीमा की जितनी जानकारी और अनुभव ज्हाओ के पास है, वो पीएलए के किसी दूसरे जनरल के पास नहीं है। ज्हाओ के नेतृत्व में चीन की सेना ने डोकलाम में भारत की सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश की थी।

माना जा रहा है कि जनरल ज्हाओ को हटाए जाने का कारण भारत की सेना चीन की सेना सख्ती से दिए गए जवाब को मानते हैं। पेंगोंग त्सो झीले के इलाक़े में घुसपैठ और गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस सख्ती से जवाब दिया, वह चीन को हैरान करने वाला रहा। पश्चिमी थिएटर कमान के नए जनरल ज्हेंग जूड़ोंग बीजिंग की सुरक्षा के लिए ज़िम्मेदार सेंट्रल थियेटर कमांड के उप-कमांडर रह चुके हैं।

चीन की सेना में पांच थियेटर कमांड हैं, जिनमें से पश्चिमी थियेटर कमांड सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि इसकी स्थापना राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने की है और इसके अधीन बड़े ही संवेदनशील इलाक़े सिचुआन, तिब्बत, निंग्शिया, कुइंगहाई, शिनजियांग, शानशी, यून्नान और चोंगकुइंग आते हैं।

एक विशेषज्ञ के अनुसार सिर्फ़ लद्दाख या गलवान में ही चीन को मुंह की नहीं खानी पड़ी बल्कि उसे दक्षिण एशिया के दूसरे दशों में भी कूटनीतिक रूप से असफलता का सामना करना पड़ा है। सीमा पर चीन वह नहीं कर पाया जो वह चाहता था। भारत की सेना की मुस्तैदी और रणनीति की वजह से उसे नाकामी हाथ लगी है, इसके चलते ही शी जिनपिंग ने पश्चिमी थिएटर कमांड का नेतृत्व बदला है।

लद्दाख सीमा पर तनाव के बीच सैन्य नेतृत्व में बदलाव इस बात का संकेत हैं कि जिनपिंग भारत की सैन्य ताक़त को वो कम कर आंकने की भूल कर रहे थे। भारत की सेना ने पीएलए को ना सिर्फ़ रोकने में कामयाबी हासिल की है बल्कि कैलाश पहाड़ियों की श्रृंखला में भारत की सेना ने नए मोर्चे संभालकर चीन के मंसूबों पर पानी फेर दिया।

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