नई दिल्ली. तिब्बत पर अंगुली उठाने की सलाह मात्र से ड्रैगन बौखला गया है। उसने भारत को धमकी दी है कि अगर अमेरिका के साथ मिलकर तिब्बत पर सवाल उठाए तो वह युद्ध को भड़काने का काम करेगी।

कुछ दिनों पूर्व भारत के चुनिन्दा सैन्य रणनीतिकारों ने सरकार को सलाह दी थी कि तिब्बत की लद्दाख में घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए भारत को तिब्बत की मान्यता पर पुनर्विचार करना चाहिए। इस सलाह से ​चीन इतना भड़क गया है कि उसने भारत के उत्तर—पूर्व में बदले की कार्रवाई के संकेत देने के साथ ही उस पर युद्ध को भड़काने का प्रयास करने तक के आरोप लगा डाले।

चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने शंघाई इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के रिसर्च सेंटर फॉर चाइना-साउथ एशिया कोऑपरेशन के सेक्रेटरी जनरल लियु जोंगयी के हवाले से कहा है कि कोई भी हिमाकत करने से पहले भारत उत्तर-पूर्व में अलगाववाद को याद कर ले। सैन्य रणनीतिकार इसे चीन की बदले की कार्रवाई के संकेत बता रहे हैं। ग्लोबल टाइम्स में छपे लेख में कहा गया है कि भारत में ब्रह्मा चेलानी जैसे कुछ रणनीतिकारों ने कहा है कि भारत सरकार को अमेरिका के साथ मिलकर तिब्बत कार्ड खेलना चाहिए। उन्होंने अमेरिका के तिब्बत कानून का लाभ उठाने की भी सलाह दी है। पूर्व भारतीय कूटनीतिज्ञ दीपक वोहरा ने कहा कि तिब्बत अपना अलग रास्ता चुनता है तो चीन के टुकड़े हो जाएंगे या फिर उसे साम्यवाद छोड़ना होगा और दुनिया अधिक सुरक्षित जगह हो जाएगी। भारतीय विशेषज्ञों की टिप्पणी से चिढ़े चीन के लेखक ने कहा कि तिब्बत चीन का हिस्सा है और भारत सरकार लंबे समय से इसे मान्यता देती आई है। यदि नई दिल्ली ऐसी सलाह को मानता है तो भारत-चीन के रिश्ते पूरी तरह खत्म हो जाएंगे और नई दिल्ली युद्ध को भड़काएगी।

चीनी एक्सपर्ट लियु ने कहा कि वास्तव में भारत ने चीन के लिए मुश्किलें खड़ी करने और अपने फायदों के लिए तिब्बत कार्ड खेलना नहीं छोड़ा है। कथित निर्वासित तिब्बत सरकार भारत में ही चल रही है और तिब्बत का प्रश्न भारत-चीन रिश्तों में अहम मुद्दा है। कुछ लोग इसलिए तिब्बत कार्ड को जोरशोर से उठाने की बात कह रहे हैं क्योंकि वे कश्मीर को भारत के हिस्से के रूप में मान्यता देने के लिए चीन को मजबूर करना चाहते हैं।

एक्सपर्ट के अनुसार चीन इसके बदले में कई कदम उठा सकता है। लेकिन आम तौर पर हम इन उपायों का उपयोग नहीं करते। उदाहरण के तौर पर कश्मीर वैश्विक मान्यताप्राप्त विवादित क्षेत्र है। चीन एकतरफा यह नहीं स्वीकार करेगा कि यह भारत का हिस्सा है। उल्लेखनीय है कि लद्दाख सेक्टर में हाल ही में भारतीय सैनिकों से टकराव में बुरी तरह चोट खाने वाले चीन ने मुखपत्र के जरिए कहा है कि भारत में चीन से जंग जीतने की शक्ति नहीं है। भारत को इस मुद्दे पर कई बार सोचना होगा कि यदि वह अमेरिका के साथ मिलकर चीन के लिए बाधाएं उत्पन्न करता है तो उसे क्या मिलेगा?

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