नई दिल्ली. चीनी ड्रेगन ने बेहद ढिठाई के साथ कहा है कि अगर विश्व कोरोना वायरस से बचना चाहता है तो उसे पश्चिमी देशों की अपेक्षा चीन में बनी वैक्सीन इस्तेमाल करनी होगी।

चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने दावा किया है कि अमेरिकी वैक्सीन कई मामलों में कमजोर हैं। अमेरिका की फाइजर वैक्सीन के तीसरे ट्रायल में इस्तेमाल किए गए सैंपल से मिली जानकारी को किसी तीसरे पक्ष से सत्यापित नहीं कराया गया है। वैसे भी फाइजर एमआरएनए वैक्सीन को अमीर देशों को ध्यान में रखकर बनाया गया है क्योंकि उसे माइनस 70 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखना होगा अन्यथा वैक्सीन का प्रभाव समाप्त हो जाएगा। अखबार का आरोप है कि फाइजर टीके के रिएक्शन को भी पश्चिमी देशों की मीडिया ने नजरअंदाज कर दिया।

ग्लोबल टाइम्स ने चीनी सिनोवैक वैक्सीन के कसीदे काढ़ते हुए कहा कि चीन की सिनोवैक कोरोना वैक्सीन न सिर्फ सुरक्षित है बल्कि इसे रेफ्रिजिरेटर के तापमान में स्टोर किया जा सकता है। ये गरीब देशों को ध्यान में रखकर बनाई गई वैक्सीन है और इसी वजह से इसकी कीमत भी कम रखी गई है। अखबार ने विश्व को सलाह दी है कि उसकी सिनोवैक वैक्सीन को विश्व स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि चीनी टीकों के परीक्षण में गंभीर दुर्घटनाओं के कोई मामले सामने नहीं आए हैं।

यहां यह उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस को मानवजनित बताने के साथ ही पूरी दुनिया शक कर रही है कि इसे चीन के वुहान की एक लैब से लीक किया गया। गुरूवार को एक अन्तरराष्ट्रीय हिंदी वेबसाइट ने दावा किया कि चीन की एक तांबे की खदान से भी वायरस के लीक होने का अंदेशा है क्योंकि चीनी सूत्रों ने जब उसे कुछ बताने का प्रयास किया तो चीन ने उसकी मीडिया टीम को तांबे की खदान तक नहीं पहुंचने दिया।

माना जा रहा है कि इसी के चलते चीनी वैक्सीन को दुनिया बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने से बच रही है और भारत, अमेरिका इत्यादि देशों में बनी वैक्सीन पर भरोसा जता रही है। इससे चीन बुरी तरह बौखला गया है और उसने इन वैक्सीन के खिलाफ प्रोपेगंडा शुरू कर दिया है।

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