नई दिल्ली. अमेरिका में साइबर हमले रूस की नहीं चीन की खुराफात हो सकती है। अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ये संदेह जताया है। अमेरिकी विदेश मंत्री एवं अन्य शीर्ष अधिकारियों ने हमले के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया है। साइबर हमले पर सार्वजनिक रूप से टिप्पणी करते हुए ट्रंप ने रूस को जिम्मेदार ठहराए जाने के विचार की खिल्ली उडाई। जबकि देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी का कहना है कि इससे सरकारी और निजी नेटवर्क को गंभीर खतरा हो सकता है।

ट्रंप ने ट्वीट किया, साइबर हैक वास्तविकता के बजाए फर्जी समाचार मीडिया में अधिक बड़ा है। मुझे पूरी जानकारी दी गई है और सब कुछ नियंत्रण में है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया चीन का हाथ होने की संभावना पर चर्चा करने को लेकर डरा हुआ है। उधर अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने कहा कि स्पष्ट है कि अमेरिका के खिलाफ खतरनाक साइबर हमले के पीछे रूस का ही हाथ था। स्पष्ट नहीं है कि हैकर्स क्या चाह रहे थे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि उनके मंसूबों में परमाणु हथियार से जुड़े रहस्य, उन्नत हथियारों की रूपरेखा, कोविड-19 टीके से संबंधित अनुसंधान और सरकार के प्रमुख नेताओं और बड़े उद्योगपतियों के बारे में जानकारी एकत्र करना शामिल हो सकता है।

पोम्पिओ ने एक रेडियो टॉक शो के संचालक मार्क लेविन के साथ साक्षात्कार में कहा कि मुझे लगता है कि इस मामले में अब हम स्पष्ट रूप से कह सकते हैं कि रूसी लोग ही इस गतिविधि में संलिप्त थे। व्हाइट हाउस साइबर हमले के पीछे रूस का हाथ होने का दावा करने वाला बयान जारी करने वाला था, लेकिन अंतिम क्षण में उसे ऐसा नहीं करने को कहा गया। व्हाइट हाउस ने ट्रंप के दावों के आधार या बयान संबंधी प्रश्नों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी है और उसने पोम्पिओ की टिप्पणियों के बारे में भी अभी कुछ नहीं कहा है।

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