नई दिल्ली. शोषण की चक्की में पिस रहे चीनी कर्मचारियों ने परेशान होकर जान देना शुरू कर दिया है। वहां के एक ई-कॉमर्स कर्मचारी ने वेतन और खुद के साथ हो रहे बर्ताव से परेशान होकर खुद को आग लगा ली। इससे चीनी सरकार पर वर्षों से लग रहे इन आरोपों की पुष्टि हो गई है कि कम्युनिस्ट देश होने के बावजूद वहां कर्मचारियों का जमकर शोषण किया जाता है।

चीनी सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की एक रिपोर्ट के अनुसार महामारी के दौरान जहां लाखों परिवार घरों में कैद रहे, वहीं सामान की मांग बढ़ गयी और कर्मचारियों ने हड्डियां तक जमाने वाली सर्दी में भी टनों सब्जी, चावल, मांस और अन्य खाद्य सामग्रियों तथा डायपर आदि की आपूर्ति की। इन कर्मचारियों से एक दिन में 12 घंटे से ज्यादा काम लिया गया लेकिन बदले में वेतन में बढ़ोतरी नहीं की गई। चीन में प्रौद्योगिकी क्षेत्र के उद्योगों में आधिकारियों की पगार अन्य कुछ उद्योगों से अच्छी है, लेकिन कर्मचारियों से एक दिन में 15 से 16 घंटे से तक काम लिया जाता है।

कर्मचारियों की दुर्दशा पर दुनिया का ध्यान उस समय गया जब ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पिंदुओदुओ के दो कर्मचारियों की मौत हो गयी। समझा जा रहा है कि अधिक काम करने की वजह से उनकी जान गई। इसे बड़ी चिंता की बात बताते हुए शिन्हुआ ने काम के घंटे कम करने की वकालत की है। ये विवाद चीन के इंटरनेट उद्योग की छवि के लिए भी झटका है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वह देश की अर्थव्यवस्था को बदल रहा है और नए रोजगार पैदा कर रहा है। इस उद्योग ने कई ई-कॉमर्स कंपनियों के संस्थापकों को दुनिया के सबसे धनी उद्यमियों तक में शामिल किया है।

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