नई दिल्ली. चीनी चुनौती का सामना कर रहे अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने कहा है कि चीन के पास अगला दलाई लामा चुनने का धार्मिक आधार नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिका के विशेष राजदूत सैमुएल डी ब्राउनबैक के अनुसार वे भारत के धर्मशाला में तिब्बती समुदाय से बात करने और उन्हें यह बताने गए थे कि अमेरिका चीन द्वारा अगला दलाई लामा चुने जाने के खिलाफ है। उसके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। ऐसा करने का धार्मिक आधार भी उसके पास नहीं है। अमेरिका इस बात का समर्थन करता है कि धार्मिक समुदायों को अपना नेता चुनने का अधिकार है। इसमें अगले दलाई लामा भी शामिल हैं।

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का यह कहना सरासर गलत है कि उन्हें इसका (दलाई लामा चुनने का) अधिकार है। 14वें दलाई लामा (85) 1959 से भारत में रह रहे हैं। निर्वासन में रह रही तिब्बती सरकार हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला से काम करती है। भारत में 1,60,000 से अधिक तिब्बती रहते हैं।

चीन पर धार्मिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में मदद नहीं मिलेगी। चीन दुनिया को यह बताने की कोशिश कर रहा है कि ये आतंकवाद को रोकने की कोशिश है, लेकिन इससे वे और अधिक आतंकवादी पैदा करेंगे। आतंकवाद से निपटने के लिए धार्मिक स्वतंत्रता देना आवश्यक है। उन्होंने चीन से अपील की कि वह उइगर, बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायियों, इसाइयों और फालुन गोंग समेत विभिन्न आस्थाओं पर हमला करना बंद करे।

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