नई दिल्ली. सम्भवत: 21वीं शताब्दी के तीसरे दशक के समाप्त होते-होते कारों का निर्माण ‘बांस’ से होने लगेगा। वैज्ञानिकों ने बांस से उस लिग्निन को बाहर करने का तरीका खोज लिया है, जो लकड़ी के ऊतक तैयार करता है।

विज्ञान पत्रिका एसीएस नैनो के पिछले साल मई में प्रकाशित अंक में छपी एक रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि बांस में से आंशिक रूप से लिग्निन को हटाकर और उसे माइक्रोवेव में पकाकर मजबूती को कई गुना किया जा सकता है। लिग्निन एक कार्बनिक पदार्थ है और वह लकड़ी के ऊतक बनाता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि हल्का और तेजी से बढ़ने वाला मजबूत बांस प्रदूषण फैलाने वाली वस्तुओं का विकल्प बन सकता है। उसका इस्तेमाल कार की बॉडी बनाने में भी किया जा सकता है।

वैज्ञानिकों ने गुजरे वर्ष में एक और चमत्कार किया है। उन्होंने ततैये के डंक की माइक्रो तस्वीरों के आधार पर एक ऐसी खोखली सुई डिजाइन की है जो ज्यादा चीरफाड़ के बिना ट्यूमर और खून के थक्कों को निकाल देगी। ततैया के डंक की बनावट एक खोखली सुई जैसी है।

उस सुई की मदद से ततैया अपने अंडे कैटरपिलर नामक परजीवी में डाल देते हैं। वैज्ञानिकों ने ततैये की सुई को ओविपोसिटर नाम दिया है। नीदरलैंड की डेल्फ्ट यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों को ततैये की ओविपोसिटर का अध्ययन करने पर पता चला कि उसमें ब्लेड बारी बारी से ऊपर और नीचे जाते हैं। इससे पैदा घर्षण अंडों को आगे धकेलता है।

वैज्ञानिकों ने इस यांत्रिकी के आधार पर ऐसी सुई डिजाइन की है जिसमें स्लाइडिंग रॉड लगे हैं। यह सुई शरीर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच कर नुकसानदेह संरचनाओं को बाहर निकालने और दवाइयों को वहां तक पहुंचाने में कारगर है।

इसी तरह जर्नल ऑफ अप्लायड साइंस के जून अंक में प्रकाशित एक रिसर्च रिपोर्ट का कहना है कि वैज्ञानिकों ने नर मकड़े के पैर से निकलने वाले जालों की मदद से ऐसे ऑप्टिकल लैंस बनाने में कामयाबी हासिल की है, जो नंगी आंखों से नहीं दिखने वाले वायरस की तस्वीर ले सकेंगे।

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