नई दिल्ली. अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के साथ ही चीन ने दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने का अभियान शुरू कर दिया है। अमेरिकी नवनिर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन के सत्ता ग्रहण से पहले चीनी विदेश मंत्री वांग यी दक्षिणपूर्व एशिया के चार देशों इंडोनेशिया, फिलीपींस, ब्रुनेई और म्यांमार पहुंचे।

चीन के लिए दक्षिणपूर्व एशिया की वही महत्ता है जो भारत के लिए दक्षिण एशिया की है या रूस के लिए सेंट्रल एशिया की। म्यांमार पहुंचे चीनी विदेश मंत्री वांग यी की 3 लाख वैक्सीन खुराक देने की पेशकश को म्यांमार ने स्वीकार कर लिया। वैसे म्यांमार ने सबसे पहले भारत से वैक्सीन भेजने का अनुरोध किया था। लेकिन लगता है कि चीन भारत से पहले वैक्सीन पहुंचा देगा।

इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच चीन की बेल्ट ऐंड रोड परियोजना पर चर्चा हुई। दोनों देशों के बीच एक मसौदे पर सहमति के तहत म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले और पोर्ट सिटी क्याकफू के बीच एक रेलवे लिंक की स्थापना होगी। मांडले में रेलवे ट्रैक बनाने और उसे क्याकफू से जोड़ने की परियोजना पर चीन ने करोड़ों डालर का निवेश कर रखा है। चीन वहां पर गहरे समुद्री पोर्ट प्रोजेक्ट को अंजाम देने में पिछले एक दशक से अधिक से जुटा है।

चीन की दूरगामी योजना है कि क्याकफू को मांडले के रास्ते चीन के सुदूर दक्षिणी प्रान्त युन्नान से जोड़ा जाय। युन्नान और क्याकफू के बीच पहले से ही गैस पाइपलाइन चल रही है। ऐसे में रेल लिंक बनाने की योजना चीन को म्यांमार के रास्ते हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी तक सीधा रास्ता देगी। यात्रा के दौरान चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने रोहिंग्या मसले पर म्यांमार की मदद करने का वादा भी किया।

वैसे भी अमेरिका में जो बाइडेन प्रशासन के आने की खबर से म्यांमार समेत तमाम मानवाधिकारों के मुद्दे पर लचर रिकार्ड रखने वाले देशों में खलबली है। माना जा रहा है कि डेमोक्रेट होने के नाते बाइडेन प्रशासन और उसके तमाम उच्चाधिकारियों का ध्यान मानवाधिकार हनन, पर्यावरण संरक्षण, मुक्त व्यापार, लोकतांत्रिक मूल्यों, नियमबद्ध क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के मुद्दों पर ज्यादा होगा। डोनसल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान म्यांमार और कंबोडिया जैसे देशों की पौ बारह हो गयी थी क्योंकि ट्रंप ने उदारवादी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के तीनों मूलभूत पहलुओं पर से सिर्फ ध्यान ही नहीं हटाया था बल्कि वह इन तीनों के विरोध में ही खड़े दिख रहे थे। ट्रंप के जाने से ऊहापोह की स्थिति म्यांमार में तो है ही चीन का मन भी बाइडेन प्रशासन के नित नये चुने जा रहे मंत्रिमंडल सदस्यों और उच्चाधिकारियों का नाम सुन कर खट्टा हो रहा है।

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