नई दिल्ली. बांग्लादेश ने रोहिंग्या शरणार्थियों के पहले समूह को उस द्वीप पर स्थान्तरित कर दिया जिसे रोहिंग्याओं को बसाने के लिए हाल ही विकसित किया गया है। द्वीप की सतह समुद्र से सिर्फ छह फीट ऊंची है।

जानकारी के अनुसार 1,642 शरणार्थी भाषण चार द्वीप पर जाने के लिए चटगांव बंदरगाह से सात पोतों में सवार हुए। यह द्वीप मानसून दौरान नियमित तौर पर डूब जाता था लेकिन यहां अब बाढ़ सुरक्षा तटबंध, घर, अस्पताल और मस्जिदों का निर्माण 11.2 करोड़ डॉलर की लागत से बांग्लादेश की नौसेना ने किया है। यह इलाका मुख्य क्षेत्र से 34 किलोमीटर दूर है और केवल 20 साल पहले ही सामने आया था। इससे पहले यहां कभी आबादी नहीं रही है।

इधर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जाहिर की है कि शरणार्थियों को स्वतंत्र तरीके से यह फैसला लेने की अनुमति दी जाए कि वे बंगाल की खाड़ी के द्वीप पर जाना चाहते हैं या नहीं। इस द्वीप पर फिलहाल जो आवास बनाए गए हैं, वहां एक लाख लोग रह सकते हैं, जो कि लाखों रोहिंग्या मुस्लिमों के हिसाब से बेहद कम है। रोहिंग्या मुस्लिम म्यामांर में हिंसक उत्पीड़न के बाद भागकर बांग्लादेश आए थे और ये यहां अभी शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं।

शून्य पर लाएगा ब्रिटेन

नई दिल्ली. ब्रिटेन ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को 2050 तक शून्य पर ले आएगा। इस लक्ष्य की घोषणा प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने शुक्रवार को की। इस लक्ष्य को यूरोपीय संघ के लक्ष्य की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी माना जा रहा है जिसकी घोषणा वह अगले सप्ताह करने वाला है। ब्रिटेन इस वर्ष यूरोपीय संघ से अलग हो गया है।

ब्रिटेन 12 दिसम्बर को संयुक्त राष्ट्र और फ्रांस के साथ ‘क्लाइमेट एंबीशन समिट’ की मेजबानी करेगा। जॉनसन ने कहा कि हम 2030 तक अपने उत्सर्जन को कम करने के महत्वाकांक्षी नए लक्ष्य के साथ आज आगे बढ़ेंगे। किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था से ज्यादा तेजी के साथ। लेकिन यह एक वैश्विक प्रयास है और इसी लिए ब्रिटेन वैश्विक नेताओं से उत्सर्जन में कमी लाने और इसे शून्य तक ले जाने की अपनी महात्वाकांक्षी योजनाओं को आगे लाने की अपील करता है।

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