नई दिल्ली. धूल कणों पर सवार जीवाणु एक से दूसरे महाद्वीप की यात्रा कर रहे हैं। ये ना केवल इंसानों और जानवरों की सेहत को प्रभावित करते हैं बल्कि जलवायु और पारिस्थितिकी पर भी असर डालते हैं।

एटमॉसफेरिक रिसर्च में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार सूक्षम कण जीवाणुओं के लिए वाहक का काम करते हैं। इनसे समूचे महाद्वीप में बीमारी के संक्रमण का खतरा रहता है। इन सूक्ष्म कणों को माइक्रोस्कोप की मदद से ही देखा जा सकता है लेकिन ये अतिसूक्ष्म कणों से थोड़े बड़े होते हैं और खनिज लवणों से बनते हैं। जीवाणुओं के आईबेरुलाइट के संपर्क में आने की प्रक्रिया को लेकर शोध जारी है।

मौजूदा अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ग्रेनेडा शहर के वायुमंडल में मौजूद धूल कणों का अध्ययन किया। अध्ययन के अनुसार ये धूल कण उत्तर-उत्तर पूर्वी अफ्रीका में सहारा मरुस्थल से थे जिसमें ग्रेनेडा की मिट्टी के भी कण मिले थे। विश्वविद्यालय में अध्ययन से जुड़े वैज्ञानिक अल्बर्टो मोलीनेरो ग्रेसिया ने कहा, जीवाणु आईबेरुलाइट पर जीवित रह सकते हैं क्योंकि उनमें पोषक तत्व मौजूद रहते हैं।

ये जीवाणु ना केवल इंसानों और जानवरों की सेहत को प्रभावित कर सकते हैं बल्कि जलवायु और पारिस्थितिकी पर भी असर डाल सकते हैं। इन सूक्ष्म कणों यानि के आईबेरुलाइट को भी माइक्रोस्कोप की मदद से ही देखा जा सकता है। वैज्ञानिकों ने आईबेरुलाइट के बारे में 2008 में पता लगाया था। शोधकर्ताओं ने बताया कि जीवाणुओं के आईबेरुलाइट के संपर्क में आने की प्रक्रिया को लेकर शोध जारी है।

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